ताजनगरी में 23 जून को दो कोरोना संक्रमितों की मौत...10 नए मरीज, 22 जून को दो संक्रमितों की मौत...आठ नए मरीज मिले, 21 जून को दो की मौत...सात नए मरीज, 20 जून को दो मरीज की मौत, आठ नए मरीज....। पिछले 15 दिन से रोजाना कुछ ऐसे ही आंकड़े आ रहे हैं।
मार्च से लेकर मई तक के मुकाबले मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि संक्रमित पहले से कम मिल रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि ऐसा क्यों हो रहा है? जब मरीज कम मिल रहे हैं तो मृतक संख्या तेजी से क्यों बढ़ रही है?
इन्हीं तारीखों के मई के आंकडे़ देखते हैं, 22 मई को दो की मौत, सात नए केस..., 21 मई को कोई मौत नहीं, छह नए केस..., 20 मई को आठ नए मरीज मिले, कोई मौत नहीं...। अंतर देखें तो तीन दिन में दो मौत, जबकि अब छह मौत। और थोड़ा पीछे चलें तो एक मई को 22 संक्रमित, कोई मौत नहीं..., दो मई को 42 संक्रमित, कोई मौत नहीं..., तीन मई को 54 संक्रमित, कोई मौत नहीं।
ये आंकड़े जिला प्रशासन ने ही जारी किए हैं। मई के शुरू में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी, तब मौतें कम हो रही थी। इसके बाद जैसे-जैसे नए मरीज मिलना कम होता गया, वैसे-वैसे मृतक संख्या बढ़ती गई।
विरोधाभास
- 20 मई : प्रमुख सचिव एम देवराज ने कहा कि 28 मरीज ऐसे रहे जिनकी मौत भर्ती होने के 48 घंटों के भीतर हुई, लापरवाही की आशंका है, जांच होगी।
- 22 मई : प्रियंका गांधी के ट्वीट कर आगरा मॉडल पर सवाल उठाया। इसके बाद डीएम प्रभु एन सिंह ने कहा कि आइसोलेशन वार्ड में कोरोना योद्धा दिन-रात जूझ रहे हैं।
- 17 मई को जनप्रनिधियों ने अफसरों के साथ बैठक में कहा कि संक्रमितों की मृत्यु दर बढ़ना चिंताजनक है।
- 23 जून को डीएम ने कहा कि जिन 28 मरीजों की 48 घंटे के उपचार के दौरान मृत्यु की बात कही जा रही है, वे सभी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे।
- 17 जून को ही जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बाजारों में सामाजिक दूरी खत्म हो रही है, इस पर प्रशासन ध्यान दे।
- अनलॉक में 22 दिनों में प्रशासन ने सामाजिक दूरी खत्म होने पर एक भी बाजार को बंद नहीं कराया है।
जांच कम होने से बिगड़ी स्थिति : पूर्व सीएमओ
पूर्व सीएमओ डॉ. एके कुलश्रेष्ठ का कहना है कि आगरा में मृत्यु दर बढ़ने की वजह नमूनों की संख्या का कम होना है। मरीज की हालत बिगड़ने पर नमूने लिए जा रहे हैं। इसके बाद उपचार में मुश्किल आती है।
उन्होंने तीन सुझाव दिए हैं। पर्याप्त मात्रा में नमूने लिए जाएं, आगरा में 400 की क्षमता है तो इतने रोज हों। नमूने जल्दी हों, मरीज में लक्षण आते ही सैंपल हो और रिपोर्ट जल्दी आए। उपचार में प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग बढ़ाया जाए। यह कई जगह कारगर रही है।
उपचार में कोई लापरवाही नहीं : डीएम
एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के 48 घंटे में 28 मरीजों की मौत के सवाल पर डीएम प्रभु एन सिंह ने कहा कि वे सभी मरीज गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। मल्टी ऑर्गन फैल्योर से उनकी हालत गंभीर थी। कोरोना नहीं होता, तो भी उनकी मृत्यु को टाला नहीं जा सकता था। उपचार में को लापरवाही नहीं हुई।