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Change in Exam Pattern: कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों की होगी तिमाही परीक्षा, आकलन कर कराई जाएगी पढ़ाई 

Mon, 04 Jul 2022 11:36 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

 हर तिमाही परीक्षा के बाद एक ही समय में सभी बच्चों का आकलन कर शिक्षक उन्हें शिक्षा प्रदान करेंगे। सभी विषयों पर छात्र-छात्राओं की पकड़ अच्छी होने से उन्हें अगली कक्षाओं में अध्ययन करने पर काफी आसानी होगी। 
 
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यूपी स्कूल (प्रतीकात्मक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फिरोजाबाद में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में भी अब कक्षा एक से आठ के छात्र-छात्राओं की तिमाही परीक्षाएं भी कराई जाएंगी। यह परीक्षाएं वर्ष में चार बार आयोजित की जाएंगी। इसके परीक्षाफल का आकलन कर छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रदान की जाएगी। तिमाही परीक्षाओं का आयोजन जुलाई माह के अंतिम सप्ताह से शुरू किया जाएगा।
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तिमाही परीक्षाओं का आयोजन जुलाई, अक्तूबर, जनवरी और मार्च में कराया जाएगा। इन परीक्षाओं का रिजल्ट कार्ड एक सप्ताह के भीतर ही वितरित किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा इससे पहले मिशन प्रेरणा के तहत वर्ष में दो बार विद्यार्थी परीक्षण टेस्ट लेने का निर्णय लिया था, लेकिन कोरोना संकट के कारण इस योजना पर पानी फिर गया था। अब हर तिमाही परीक्षा के बाद अलग लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। रिजल्ट के आधार पर छात्र-छात्राएं जिन विषयों में कमजोर मिलेंगे।

उस विषय की शिक्षा पर अध्यापकों द्वारा विशेष ध्यान दिया जाएगा। ताकि छात्र सभी विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत बना सके। हर तिमाही परीक्षा के बाद एक ही समय में सभी बच्चों का आकलन कर शिक्षक उन्हें शिक्षा प्रदान करेंगे। सभी विषयों पर छात्र-छात्राओं की पकड़ अच्छी होने से उन्हें अगली कक्षाओं में अध्ययन करने पर काफी आसानी होगी। 

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बहुविकल्पीय होंगे प्रश्न

तिमाही परीक्षा में छात्र-छात्राओं से बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। जिनका उत्तर उन्हें ओएमआर शीट पर देना होगा। परीक्षा के बाद दो घंटे में शिक्षक ओएमआर शीट की फोटो खींचकर निर्धारित एप पर अपलोड करेंगे। जिससे शीघ्र ही उन्हें रिजल्ट प्राप्त हो जाएगा।

सुधरेगी शिक्षा की गुणवत्ता 

बीएसए अंजली अग्रवाल ने बताया कि तिमाही परीक्षाओं के आयोजन से शिक्षकों को यह पता चल सकेगा कि छात्र-छात्राएं किस विषय में कमजोर हैं। ऐसे में उस विषय की शिक्षा प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। जिससे प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार होगा और सभी विषयों पर छात्र-छात्राओं की पकड़ अच्छी होगी।
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