हाईकोर्ट खंडपीठ की स्थापना की मांग पर आंदोलित अधिवक्ताओं ने बुधवार को दीवानी के तीन गेटों पर ताले जड़ दिए। मुख्य गेट पर पुलिस प्रशासनिक अफसरों ने तालाबंदी करने से रोका तो तीखी झड़पें हुईं। पुलिस से हाथापाई भी हुई। डेढ़ घंटे तक पुलिस और वकीलों के बीच जोर आजमाइश चलती रही। इसके बाद वकीलों ने मुख्य गेट पर भी ताला जड़ दिया। उधर, जिला जज ने भी तालाबंदी पर नाराजगी जताई।
उच्च न्यायालय खंडपीठ संघर्ष समिति के पूर्व घोषित तालाबंदी की घोषणा के मद्देनजर सुबह से ही एसपी सिटी समीर सौरभ, एडीएम फाइनेंस राजकुमार, सीओ हरीपर्वत अशोक कुमार सिंह के साथ भारी पुलिस बल दीवानी में गेट नंबर एक पर मौजूद था। सुबह 10 बजे से वकीलों ने न्यायालयों में कार्य बहिष्कार करके दीवानी के गेटों पर तालाबंदी करना शुरू कर दिया। तीन गेटों पर ताले लगाने के बाद वकील मुख्य गेट पर पहुंचे। यहां मौजूद अधिकारियों ने तालाबंदी से रोक दिया। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया। वकीलों ने गेट बंद करने का प्रयास किया तो पुलिसकर्मियों से हाथापाई हो गई। इसी बीच एसपी सिटी ने संघर्ष समिति के संयोजक केडी शर्मा से कहा कि आप साथियों को समझाएं वरना कुछ हो गया गया तो दोष मत देना। इस पर वकील और भड़क गए। अधिकारियों ने बताया कि जिला जज के आदेश हैं कि मुख्य गेट बंद नहीं होना चाहिए, लेकिन वकील नहीं मानें। यहां दोपहर 12 बजे तक पुलिस और वकीलों के बीच नोंकझोंक होती रही। इसी दौरान कुछ वकीलों ने दीवानी से निकलकर रोड जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें दीवानी के अंदर धकेल दिया। इसके बाद वकील धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद पुलिस अधिकारी संघर्ष समिति के संयोजक को जिला जज के चेंबर में ले गए। यहां जिला जज ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश हैं, गेट बंद नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि दीवानी आपका और हमारा घर है, इसमें ताला कैसे लगा सकते हैं। इसी दौरान वकीलों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इस मौके पर अरुण सोलंकी, अजय सिंह, देव चौधरी, अमरनाथ सोलंकी, शिशुपाल कंसाना, आशुतोष श्रोत्रिय, नितिन शर्मा, अरुण पचौरी, केशव वशिष्ठ, तेज सिंह बघेल, देवेंद्र धाकरे, राकेश भरटनागर, बीएस फौजदार, राजेंद्र गुप्ता, सुलेंद्र लाखन, अविनाश शर्मा, अरविंद मिश्रा, सुधीश जैन, शैलेंद्र रावत, सत्यप्रकाश सिंह, मृगेश कुलश्रेष्ठ समेत सैकड़ों वकील थे।
दो जनवरी को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन
संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि 25 से 31 दिसंबर के शीतकालीन अवकाश में भी वकील चुप नहीं बैठेंगे। अवकाश के दिनों में तहसीलों और कमिश्नरी में बैठकें करके आंदोलन को गति देने पर विचार होगा। दो जनवरी को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन होगा। तीन को फीरोजाबाद में बैठक होगी।
केंद्रीय राज्यमंत्री का चौतरफा विरोध
वकीलों में केंद्रीय राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया के रवैये को लेकर आक्रोश है। धरने में वक्ताओं ने कहा कि वह मंत्री बनकर आगरा की बात करने में शर्म महसूस कर रहे हैं। आगामी चुनाव में उन्हें जनता सबक सिखाएगी। वकील चुप नहीं बैठेंगे।