नमामि गंगे अभियान में संरक्षण के लिए चुनी गई डॉल्फिन का चंबल नदी नया बसेरा बन गया है। सोमवार को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस पर इंग्लैंड के पर्यटक चंबल में घड़ियालों के बीच गोते लगाती डॉल्फिन को देखकर चहक उठे। 1996 में आईयूसीएन की लुप्तप्राय जलीय जीवों की सूची में शामिल डॉल्फिन (सूंस) का चंबल नदी में संरक्षण हो रहा है।
ये भारत, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान में ही बची हैं। 5 अक्टूबर 2009 में डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। वर्ष 2012 में मेरी गंगा, मेरी सूंस अभियान में प्रदेश की नदियों में डॉल्फिन की संख्या 671 पाई गई थी। जिनमें चंबल नदी में मौजूद 78 डॉल्फिन भी शामिल थी।
बाह रेंजर आरके सिंह राठौर ने बताया कि आईयूसीएन की लुप्तप्राय जीवों की सूची में शामिल डॉल्फिन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इन्हें गोते लगाते देखने के लिए चंबल में देसी-विदेशी सैलानी आते हैं। मार्च से अक्तूबर प्रजनन काल रहता है। इसमें निगरानी की जा रही है।
राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस
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बटेश्वर में नमो कालिंदी अभियान से किया प्रेरित
राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस पर बटेश्वर के गंगा घाट पर नमो कालिंदी अभियान के तहत जन सामान्य को डॉल्फिन के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। सोसायटी फार कंजर्वेशन आफ नेचर के कार्यक्रम में राजीव चौहान ने लोगों को डॉल्फिन के महत्व को समझाया।
उन्होंने बताया कि बताया कि डॉल्फिन और जैव विविधता के संरक्षण के लिए यमुना के पुनुरुद्धार के लिए नमो कालिंदी अभियान शुरू किया गया है। इस दौरान राधेश्याम यादव, गिरवर वर्मा, नितिन गोस्वामी, रविकांत, रंजीत पुजारी, अर्जुन, शिशुपाल, मुनेंद्र, अंकित गोस्वामी, प्रदीप प्रजापति मौजूद रहे।