पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की प्रधानमंत्री की अपील पर नगर निगम में अफसरों के वाहनों पर हो रहे डीजल खर्च को आधा करने का प्रस्ताव दिया गया है। बृहस्पतिवार को कार्यकारिणी की बैठक में पार्षद राकेश जैन ने निगम अधिकारियों पर दो-दो वाहन होने और डीजल का खर्च दो से तीन गुना ज्यादा होने पर सवाल उठाए। उन्होंने 50% कटौती तत्काल लागू करने का प्रस्ताव पेश किया।
कार्यकारिणी सदस्य राकेश जैन ने मेयर हेमलता दिवाकर से कहा कि विभाग की जगह निगम के ऐसे अधिकारियों को दो-दो कारें आवंटित की गई है, जो अधिकृत नहीं हैं। इन पर डीजल खर्च दो से तीन गुना ज्यादा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद अधिकारी एक ही वाहन में पूल करके क्षेत्र का निरीक्षण करें। अतिरिक्त ईंधन के लिए नगर आयुक्त की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य किया जाए।
उन्होंने नगर निगम में कूड़ा उठाने पर हो रहे 27.85 करोड़ रुपये खर्च का ब्योरा पेश किया और इसमें भारी भ्रष्टाचार होने के आरोप लगाए। कहा कि डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम निजी कंपनी कर रही है। ऐसे में निगम का डीजल खर्च ढाई गुना कैसे बढ़ गया, जबकि यह कम होना चाहिए था। 800 मीट्रिक टन में से 550 मीट्रिक टन कचरा कंपनी ले जाती है। निगम केवल 250 मीट्रिक टन कचरा, सिल्ट, सीएंडडी वेस्ट ही उठा रहा है।
बंदरों की नसबंदी पर घटाया खर्च
कार्यकारिणी में बजट पर बंदरों, कुत्तों की नसबंदी पर 2.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रख गया था, लेकिन पार्षदों ने कहा कि पहले ही नसबंदी के काम में लापरवाही बरती जा रही है। इसका बजट अभी 1.10 करोड़ रुपये किया जाएगा। अगर काम ठीक रहा तो पुनरीक्षित बजट में इसे बढ़ा दिया जाएगा।
ऐसे बढ़ा डीजल खर्च साल डीजल खर्च
| साल |
डीजल खर्च |
| 2017-18 |
10.87 करोड़ रुपये |
| 2021-22 |
21.71 करोड़ रुपये |
| 2024-25 |
25.98 करोड़ रुपये |
| 2025-26 |
27.85 करोड़ रुपये |