उत्तर प्रदेश के आगरा में कुर्क संपत्ति की नीलामी नहीं होने से घर खरीदार खाली हाथ हैं। बिल्डर की गिरफ्तारी और जेल भेजने के बाद भी ग्राहकों की रकम नहीं लौटी। रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के आदेश पर जारी रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) की वसूली में प्रशासन पर लचर रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं।
मैसर्स निखिल होम्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक शैलेंद्र अग्रवाल पर 42 ग्राहकों से धोखाधड़ी का आरोप है। फ्लैट खरीदारों की रकम डूब गई। बिल्डर ने करोड़ रुपया वसूल लिया और खरीदारों को फ्लैट नहीं मिले। ग्राहकों ने रेरा में शिकायत की। रेरा ने डीएम आगरा को आरसी के माध्यम से ग्राहकों की रकम वसूलने के आदेश दिए।
आरसी जारी होने के दो साल बाद प्रशासन ने जुलाई 2023 में निखिल होम्स के चमरौली स्थित प्रोजेक्ट निखिल रॉयल पार्क अपार्टमेंट को कुर्क कर लिया। कुर्की के बाद भी बिल्डर ने रकम नहीं लौटाई तो प्रशासन ने शैलेंद्र अग्रवाल और हमनाम साले शैलेंद्र अग्रवाल को गिरफ्तार कर कर जेल भेजा। दोनों फर्म में हिस्सेदार थे। जमानत पर जेल से बाहर आ गए। लेकिन, 42 ग्राहक अब भी खाली हाथ हैं। कुर्क संपत्ति की नीलामी नहीं होने से ग्राहकों की 21.92 करोड़ रुपये की बकाया राशि लौट नहीं सकी।
यह हाल तब है जब मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी और जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी सदर तहसील प्रशासन को बकाया आरसी की वसूली के निर्देश दे चुके हैं। फिर भी वसूली नहीं हो पा रही। ऐसे में तहसील प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिल्डर से तहसील कर्मियों की मिलीभगत के आरोप भी लग रहे हैं। इस बारे में डीएम भानुचंद्र गोस्वामी का कहना है कि एसडीएम व तहसीलदार से आरसी वसूली पर रिपोर्ट मांगी जाएगी।