मथुरा समेत प्रदेश के कई जिलों में भर्ती घोटाला सामने आने के बाद विभाग के अफसरों पर शिकंजा कसा जा रहा है। बीएसए, एबीएसए और बाबुओं की संपत्ति की जांच कराई जा रही है।
विजिलेंस और एसटीएफ को इसके लिए लगाया गया है। मथुरा में 108 फर्जी शिक्षकों का भर्ती घोटाला एसटीएफ ने खोला है। इसमें मुख्य आरोपी बीएसए के बाबू महेश शर्मा समेत 16 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।
यह घोटाला 30 करोड़ से भी ऊपर का माना जा रहा है। शिक्षक बनाने के लिए 15-15 लाख रुपये लिए गए थे। मथुरा का घोटाला खुलने के बाद से ही प्रदेश भर से शिकायतें गूंजने लगी हैं।
एसटीएफ ने भी कई जिलों से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संपत्ति की जांच भी शुरू कराई जा रही है। शिक्षा विभाग के कई बाबू करोड़पति हैं।
एनसीआर में कोठियां बना रखी हैं। मथुरा में भर्ती घोटाले में पकड़ा गया महेश शर्मा कालेज खोलने की तैयारी कर रहा था। प्रदेश के बाकी बीएसए आफिस में भी इस तरह के बाबू हैं जो कुछ ही दिनों में करोड़पति बन गए हैं।
लग्जरी गाड़ियां खरीद ली हैं। आलीशान मकान बना लिए हैं। कई जिलों से तो एसटीएफ के पास बाबुओं की कोठियों के फोटो तक लोगों ने भेजे हैं। विजिलेंस तक भी इस प्रकार की शिकायतें पहुंची हैं।
बाबू के माध्यम से पैसा लेते अधिकारी
एसटीएफ को जांच में पता चला है कि चाहे शिक्षकों को ज्वाइन कराने का मामला है या फिर निरीक्षण के दौरान रिपोर्ट बनाने का। बाबू के माध्यम से ही शिक्षकों से पैसा लिया जाता है।
अगर कोई शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं जाता तो वह भी आफिस में पैसा देता है। एसटीएफ ने बीएसए आफिस में बाबू के सील कमरे को खुलवाकर जब खंगाला तो एक बड़ा रिकार्ड गायब मिला है।
माना जा रहा है कि इस घोटाले से जुड़े लोगों ने सारे दस्तावेज पहले ही हटा लिए थे। एसटीएफ के एसपी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि जो रिकार्ड गायब है।
उसके बारे में जानकारी की जा रही है। कई रजिस्टर भी नहीं मिल रहे हैं। ज्वाइनिंग के लेटर कब कब जारी किए गए इसका भी कोई दस्तावेज नहीं मिल सका है।