फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां पानी कम होने से जलजीवों पर गहराया संकट, दशकों के बाद हुई ऐसी स्थिति

Wed, 27 Jun 2018 12:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
चंबल नदी में पानी कम हाे गया है - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आगरा में चंबल नदी में पानी का संकट गहरा गया है। यह संकट न केवल पेयजल से जुड़ा है, बल्कि देश की एकमात्र घड़ियाल सेंक्चुरी से भी जुड़ा है। 
विज्ञापन


नदी में पानी की कमी के कारण घड़ियालों पर संकट खड़ा हो गया है। बाह में कई गांवों से गुजरती चंबल नदी में पानी केवल दो से चार फुट तक रह गया है। 

डीएफओ चंबल ने नदी में पानी छुड़वाने के लिए कोटा बैराज को पत्र लिखा है।चंबल नदी में बीते साल तक 1681 घड़ियाल और 615 मगरमच्छ पाए गए। 
Trending Videos

कम पानी हाेने से जलजीव परेश्ाान
इस साल की गणना की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। तीन दशकों में यह पहला मौका है, जब चंबल नदी में पानी केवल दो फुट तक रह गया हो। 

चंबल की पहचान तेज बहाव वाली और हमेशा स्वच्छ पानी से भरी रहने वाली नदी की है। घड़ियाल सेंक्चुरी में पानी की कमी के कारण इन पर संकट खड़ा हो गया है।

रेत और पानी कम होने से घड़ियालों की भीड़ एक जगह होगी, जिससे भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। नदी के कई जगह सूखने से प्राकृतिक प्रवास स्थल में बदलाव आएगा। 
विज्ञापन

डाल्फिन पर भी संकट

जलजीव - फोटो : अमर उजाला
घड़ियालों के अलावा स्वच्छ जल में पाई जाने वाली डाल्फिन पर भी संकट खड़ा हो गया है। डाल्फिन को तैरने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत है।

चंबल नदी में मध्य प्रदेश और राजस्थान ने कई पेयजल परियोजनाएं बना ली हैं। पिछले दस सालों में राजस्थान ने धौलपुर, कोटा और इसके बीच में चार बड़ी पेयजल परियोजनाओं को शुरू किया है। 

जिनसे हजारों गांव तक पानी पाइप लाइन के जरिए पहुंचाया जा रहा है। इसी तरह मध्य प्रदेश ने भी पेयजल योजनाओं को शुरू किया है। हर दिन लाखों गैलन पानी चंबल से निकाला जा रहा है। 

चंलब के डीएफओ आनंद कुमार ने बताय कि चंबल नदी में पानी कम होने के कारण घड़ियालों पर असर पड़ सकता है, इसे देखते हुए कोटा बैराज से पानी छोड़ने के लिए पत्र भेजा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें