आगरा। ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) में नए बिजली कनेक्शन नहीं मिलने के कारण व्हाइट कैटेगरी और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है। बिजली नहीं मिलने, जनरेटर चलन से बाहर होने और गेल गैस की पीएनजी आपूर्ति में कटौती के कारण 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के प्रतिनिधिमंडल ने इन समस्याओं को लेकर बुधवार को मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप से मुलाकात की। मंडलायुक्त ने उद्यमियों को आश्वस्त किया है कि 1 जून को होने वाली टीटीजेड समिति की बैठक में बिजली कनेक्शन का मुद्दा प्रमुखता से रखा जाएगा। मंडलायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री टीटीजेड क्षेत्र के प्रति बेहद गंभीर हैं और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। चैंबर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल में अंबा प्रसाद गर्ग, विनय मित्तल, सीताराम अग्रवाल, मनीष अग्रवाल और सदस्य प्रशांत जैन शामिल रहे।
कनेक्शन न मिलने से गहराया संचालन का संकटचैंबर अध्यक्ष मनोज कुमार ने मंडलायुक्त को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत शहर में न तो नए उद्योग आ रहे हैं और न ही पुरानी इकाइयों का विस्तार हो रहा है। इसके बावजूद, जो उद्यमी पुराने जनरेटर हटाकर नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें टीटीजेड में रोक का हवाला देकर कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। ब्रश और हैंडीक्राफ्ट जैसे उद्योग, जिनसे कोई प्रदूषण नहीं होता, वे बिना बिजली के ठप पड़ रहे हैं। वहीं, गेल गैस द्वारा आपूर्ति में कटौती की जा रही है, जिससे संकट और बढ़ गया है। चैंबर ने मांग की है कि उद्योगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में तुरंत बिजली कनेक्शन दिए जाएं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कनेक्शन देने पर कोई रोक नहीं लगाई है।
गेल गैस के मनमाने बिलों पर रोष, जल्द होगी संयुक्त बैठक
उद्यमियों ने बताया कि आगरा को 11 लाख घन मीटर गैस आवंटित है और पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसमें कोई कटौती नहीं की है। इसके बावजूद गेल गैस पिछले तीन महीने से उद्यमियों को ओवरड्राल (तय सीमा से अधिक इस्तेमाल) के प्रोविजनल बिल भेज रहा है। बार-बार पत्राचार के बावजूद गेल गैस कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा है। मंडलायुक्त ने इस समस्या के समाधान के लिए जल्द ही अपनी अध्यक्षता में गेल गैस अधिकारियों के साथ आपात बैठक कराने का भरोसा दिया है।
रखरखाव शुल्क के नाम यूपीसीडा की मनमानी
पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने यूपीसीडा द्वारा 1 जनवरी, 2025 से मांगे जा रहे 35 रुपये प्रति वर्ग मीटर के रखरखाव शुल्क को उद्यमियों पर दोहरी मार बताया। उन्होंने कहा कि उद्यमी 31 मार्च 2025 तक का गृहकर नगर निगम को पहले ही दे चुके हैं। यूपीसीडा की यह दर नगर निगम के टैक्स से डेढ़ से दो गुना तक अधिक हैं। चैंबर ने मांग की है कि प्रयागराज में शुल्क 55 रुपये से घटाकर 21 रुपये किया गया है, आगरा में भी इस शुल्क को कम किया जाए।
जाम से उबारने के लिए शुरू
कराएं सेटेलाइट बस अड्डा
पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल ने शहर में जाम की समस्या को उठाते हुए कहा कि फाउंड्री नगर में रोडवेज की भूमि पर सेटेलाइट बस अड्डा बनकर तैयार है। इसका उद्घाटन 14 फरवरी, 2026 को होना था, जो अपरिहार्य कारणों से टल गया। यदि इसका ऑनलाइन उद्घाटन कर हाथरस, अलीगढ़ और मेरठ मार्ग की 350 बसों का संचालन यहां से शुरू कर दिया जाए, तो शहर के भीतर से भारी वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण व जाम से बड़ी राहत मिलेगी।