आगरा के निजी स्कूलों में बच्चों को महंगी किताब और ड्रेस देने पर लगाम नहीं लग पा रही है। शासनादेश के बाद भी कई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावक और बच्चों को खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। अमर उजाला लगातार इस मामले को उठा रहा है। अब शिक्षा अधिकारी सक्रिय हुए तो स्कूलों में निजी किताबें और ड्रेस के मामलों की पोल खुलने लगी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मंगलवार को कुछ स्कूलों में छापा मारा, तो सच्चाई सामने आई। ऐसे 55 स्कूलों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने एनसीईआरटी के स्थान पर निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाने वाले मिनी मॉन्टेसरी स्कूल लॉयर्स कॉलोनी, महेंद्र प्रताप सिंह जूनियर हाईस्कूल टैगोर नगर और जेडी पब्लिक स्कूल लॉयर्स कॉलोनी का निरीक्षण किया। कक्षाओं के अंदर बच्चों की किताबें देखीं, तो सभी निजी प्रकाशक की मिलीं।
एनसीईआरटी की किताबें न लगाने का जवाब स्कूल प्रबंधक नहीं दे सके। बीएसए ने बताया कि एक स्कूल के बाहर बुक एजेंसी संचालित होती मिली। निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने पर नोटिस जारी किया जाएगा। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। अब तक 55 स्कूलों की सूची तैयार की जा चुकी है, जिनको नोटिस दिया जाएगा। नोटिस का जवाब न देने पर कार्रवाई की जाएगी।
किसान नेता की शिकायत पर होगी जांच
भारतीय किसान यूनियन के एक पदाधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगाने की शिकायत की है। बीएसए ने बताया कि शासन की तरफ से एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद भी कई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई कराई जा रही है। अभिभावकों और बच्चों को महंगी किताबें और ड्रेस खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। किसान नेता की शिकायत में शामिल स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।