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कोरोना के इलाज के नाम पर 'लूट': आगरा में निजी अस्पतालों ने तय दरों से चार गुना तक अधिक बिल वसूला

Sat, 15 May 2021 09:28 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

आगरा में निजी अस्पताल कोविड मरीजों के इलाज का मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कोविड मरीजों से सरकारी दर से अधिक वसूली की गई है। लेकिन अब तक सिर्फ एक अस्पताल पर ही कार्रवाई हुई है। 
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ऑक्सीजन मास्क लगाकर अस्पताल की सीढ़ियों पर बैठी मरीज (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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आगरा में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में निजी अस्पतालों ने कोविड संक्रमित मरीजों के इलाज का मनमाना बिल वसूला है। प्रदेश सरकार की ओर से निजी अस्पतालों में इलाज की तय दर से तीन से चार गुना अधिक का बिल बनाया गया। जिनकी लगातार शिकायतें आ रही हैं। स्थानीय प्रशासन केवल एक अस्पताल को ही डिबार कर सका है। मरीजों की अन्य शिकायतों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा दौरे में ऐसे निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। 

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केस-1: 20 दिन के वसूले 8 लाख रुपये
एमजी रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती सुशीला देवी की 30 अप्रैल को मौत हो गई। उनके शव को देने से पहले परिवार से 8 लाख रुपये इलाज के नाम पर ले लिए गए। कोविड संक्रमित बेटी रीता गर्ग ने अब खुद के ठीक होने के बाद मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है कि निजी अस्पताल ने 20 दिन के इलाज के 8 लाख रुपये वसूल कर मां का शव दिया।

केस-2: 8 दिन के 2.56 लाख रुपये लिए
न्यू आगरा स्थित एक अस्पताल में भर्ती अजीत कुमार से 8 दिन के 2.56 लाख रुपये वसूले गए, जबकि वह न वेंटिलेटर पर थे और न ही आईसीयू में। केवल ऑक्सीजन बेड देकर अस्पताल ने ढाई लाख रुपये का बिल बना दिया। पीपीई किट सैनेटाइजर के हर दिन ढाई हजार रुपये और दवाओं के 60 हजार रुपये वसूले गए, जिनमें न तो रेमडेसिविर इंजेक्शन था, न ही अन्य कोई महंगी दवाएं।

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केस-3: चार दिन में बनाया 4 लाख का बिल
कमला नगर स्थित निजी अस्पताल ने कोरोना संक्रमित मरीज का चार लाख रुपये का बिल बना दिया, जबकि वह केवल चार दिन ही भर्ती रहे। अस्पताल के मनमाने रेट वसूलने की शिकायत अब उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री को भेजी है। ऑक्सीजन, दवाओं और मरीज के खाने के बिल अनाप शनाप लगाए गए हैं। परिवार अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

प्रदेश सरकार ने तय किए थे ये रेट
प्रदेश सरकार ने 13 अप्रैल को शासनादेश जारी कर इलाज के खर्चे नियमानुसार हर दिन 10,000 से लेकर 18000 रुपये तक तय किए थे। इसमें डॉक्टर के राउंड लेने, पीपीई किट, जरूरी दवाइयां आदि का निर्धारण भी किया गया है। 

निजी अस्पतालों में एनएबीएच प्रमाणित के लिए आइसोलेशन वार्ड में 10 हजार रुपये, आईसीयू में 15 हजार रुपये और वेंटिलेटर बेड के लिए 18 हजार रुपये तय हैं। इसी तरह एनएबीएच (नेशनल एक्रेडिशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर) प्रमाणपत्र के बिना चल रहे अस्पतालों में आइसोलेशन के लिए 8 हजार, आईसीयू में 13 हजार और वेंटिलेटर बेड के लिए 15 हजार रुपये तय किए गए हैं।
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भर्ती करने के समय एक लाख रुपये की मांग
प्रदेश सरकार की तय दर के उलट निजी अस्पतालों ने आगरा में दिल्ली के मल्टीस्पेशियेलिटी अस्पतालों से ज्यादा बिल वसूला। हाईवे स्थित अस्पताल ने मरीज भर्ती करने से पहले ही एक लाख रुपये वसूले, जबकि हर दिन 40 से 60 हजार रुपये का बिल बनाया गया। इसमें रेमडिसिविर इंजेक्शन का खर्च शामिल नहीं है। कोरोना संक्रमण में अस्पतालों को मनमाने बिल देने के बाद भी अपने परिजनों को न बचा सके लोग अब अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री को मेयर सौंपेंगे अस्पतालों की लूट का चिट्ठा
मेयर नवीन जैन के पास हर दिन निजी अस्पतालों में मनमाने बिल और लूट खसोट की शिकायतें पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उन्होंने निजी अस्पतालों के रेट की शिकायतें की थीं। मेयर नवीन जैन ने लोगों से कहा है कि वह निजी अस्पतालों में सरकार की ओर से तय दर से ज्यादा वसूली की शिकायतें करें। वह इन शिकायतों को मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। ऐसे अस्पताल प्रदेश सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। उनके पास लगातार शिकायतें आ रही हैं। सरकार ने जो दर तय की हैं, उससे कई गुना ज्यादा तक वसूली की जा रही है।

मजिस्ट्रेट से कराएंगे शिकायतों की जांच
जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने कहा कि सभी कोविड व नॉन कोविड अस्पतालों में शासनादेश में तय इलाज खर्च ही मरीजों से लिया जाएगा। अब तक तीन शिकायतें मिलीं जिनमें दो गलत, एक सही पाई गई, जिस पर डिबार करने की कार्रवाई की गई है। सीएमओ टीम व मजिस्ट्रेट से मनमाने रेट वसूलने की शिकायतों पर दोनों पक्षों की जांच कराएंगे। अवैध बिलिंग पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। 
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