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नोडल अधिकारी ने लिया स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा, चादर मिलीं साफ, अस्पताल में दवाओं का टोटा

Fri, 18 Oct 2019 11:48 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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मरीजों से जानकारी लेते नोडल अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रमुख सचिव और जिले के नोडल अधिकारी देवेश चतुर्वेदी ने जिला अस्पताल, बरौली अहीर सीएचसी, इटौरा पीएचसी का निरीक्षण किया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं का टोटा मिला। इटौरा पीएचसी तक सड़क नहीं थी। जिला अस्पताल में आयुष्मान लाभार्थी का डेटा नहीं मिला। इस पर जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। 
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प्रमुख सचिव करीब साढ़े बारह बजे जिला अस्पताल पहुंचे। पर्चा काउंटर का फर्श टूटा था। काउंटर पर वर्गीकरण बोर्ड नहीं लगा था। फर्श बनाने और सुविधा बढ़ाने को कहा। नई इमारत में रैंप न बनने पर नाराजगी जताई, छज्जा भी टेढ़ा बताया। 

महिला वार्ड में गुड्डी देवी और प्रीति से दवाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। डायलिसिस केंद्र पर रोजाना लाभार्थी मरीजों की जानकारी की। एसआईसी से आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की संख्या पूछी तो इसका कोई रिकार्ड नहीं था। 
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मरीजों से जानकारी लेते नोडल अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
ब्लड बैंक का भी हाल देखा, रक्तदाता और रक्त पाने वालों का पूर्ण विवरण दर्ज करने को कहा। आश्रय स्थल की दशा सुधारने के भी निर्देश दिए। डेढ़ घंटे तक निरीक्षण करने के बाद कार्यालय में विकास कार्यों की समीक्षा की। डीएम एनजी रवि कुमार, सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स और एसआईसी डॉ. एसके वर्मा रहे।

'आज तो चादर साफ दिख रही हैं...'

जिला अस्पताल के वार्ड का निरीक्षण करते हुए प्रमुख सचिव ने चमचमाती चादर देखी तो चुटकी लेते हुए कहा कि आज तो चादर साफ नजर आ रही हैं, रोजाना ऐसे ही रहती हैं। इस पर एसआइसी ने कहा कि रोजाना साफ चादरें ही बिछाई जाती हैं।

जिला अस्पताल, बरौली अहीर, इटौरा में निर्माण कार्य और फर्नीचर समेत अन्य खरीद के भौतिक सत्यापन के निर्देश डीएम को दिए हैं। उनसे सभी कार्यों की सूची बनाकर इसकी रिपोर्ट बनाकर भेजने को कहा है।
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झोलाछाप पर रिपोर्ट तलब की

जिला अस्पताल में मीडिया से रूबरू होते हुए प्रमुख सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि पंजीकृत अस्पतालों को ऑनलाइन करने के शासन के निर्देश हैं। झोलाछाप और अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई में ढिलाई क्यों की जा रही है, इसकी रिपोर्ट तलब की जाएगी। मरीज भर्ती पर रोक के बावजूद इलाज होना गंभीर मामला है। 

एआरवी की कमी पर उन्होंने कहा कि एक मामला सामने आया है, जिसमें एआरवी होने पर भी बच्ची को नहीं लगाया, इस पर कार्रवाई हो गई है। मरीज बिना एआरवी के नहीं लौटे, इसकी हिदायत देती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के गैरहाजिर रहने के मामले को भी उन्होंने गंभीर बताया। कहा कि सीएमओ और डीएम से इनकी रिपोर्ट मांगी है, कार्रवाई तय है। 


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