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'प्रहलाद के गांव' में आज भी होती है 'अग्निपरीक्षा', होली पर धधकते अंगारों से गुजरता है पंडा

Tue, 19 Mar 2019 09:48 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोसीकलां (मथुरा)
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बाबूलाल (पंडा फाइल)
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ब्रज की अद्भुत और अलौकिक होली पूरे विश्व में जानी जाती है। होली के पर्व पर यहां सदियों पुरानी लीलाएं जीवंत हो जाती हैं। इनमें भक्त प्रहलाद की लीला भी शामिल हैं, जिसे मथुरा के गांव फालैन में आज भी एक पंडा परिवार जीवंत किए हुए है। 
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मथुरा जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर फालैन गांव है, जिसे प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। यहां 21 मार्च को भक्त प्रहलाद एवं होलिका लीला का निर्वहन 50 वर्षीय बाबूलाल पंडा छठवीं बार करेंगे। बुधवार और गुरुवार दो दिन होली का मेला चलेगा। 

फालैन में पंडा मेला के लिए बाबूलाल पंडा व्रत धारण किए हुए हैं। जो कि इस परंपरा को निभाएंगे। बुधवार को मेले का आगाज होते ही सुबह से फालैन ग्राम पंचायत के सात गांवों के श्रद्धालु यहां ढोल नगाड़ों के साथ रंग बरसाते हुए होलिका पूजन के लिए पहुंचेंगे। 
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फालैन में दो दिन चलता है मेला

इसी के साथ फालैन में पंडा मेले का आगाज हो जाएगा। गुरुवार की सुबह चार बजे धधकती होली की आग से पंडा गुजरेगा। इसके लिए प्रहलाद कुंड एवं प्रहलाद मंदिर के बीच में दस फुट ऊंची एवं 20 फुट व्यास की होलिका सजाई गई है। 

मान्यता है कि गांव के निकट ही साधु तप कर रहे थे। उन्हें स्वप्न में डूगर के पेड़ के नीचे एक मूर्ति दबी होने की बात बताई। इस पर गांव के कौशिक परिवारों ने खोदाई कराई। जिसमें भगवान नृसिंह और भक्त प्रहलाद की प्रतिमाएं निकलीं। 

प्रसन्न होकर तपस्वी साधु ने आशीर्वाद दिया कि इस परिवार का जो व्यक्ति शुद्ध मन से पूजा करके धधकती होली की आग से गुजरेगा, उसके शरीर में स्वयं प्रहलादजी विराजमान हो जाएंगे। आग की ऊष्मा का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इसके बाद यहां प्रहलाद मंदिर बनवाया गया। पास ही प्रह्लाद कुंड का निर्माण हुआ और तब से आज तक प्रहलाद लीला को साकार करने के लिए फालैन गांव में आसपास के पांच गांवों की होली रखी जाती है। फालैन को प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। 
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देश-विदेश से आते हैं लोग

सभी गांवों के लोग होली नृत्य करते, ढोल मजीरे बजाते, गुलाल अबीर की बरसात करते हुए प्रहलाद मंदिर पर पहुंचते हैं। मंदिर पर पूजा अर्चना और कुंड में आचमन करने के बाद 30 फुट व्यास की होली को अंतिम रूप दिया जाता है। इसकी उंचाई भी 10 से 20 फुट होती है। 

धधकती होली होली से जिस समय पंडा निकलता है उस समय उस होली के आसपास खड़े रहना भी संभव नहीं होता है। प्रहलाद के मेले के नाम से प्रसिद्ध फालैन गांव की होली में आसपास बड़ा नगाड़ा बजाती हुई चौपाल मंडलियां आती हैं और रात भर होली के रसिया गांव में गूंजते हैं। 

देश-विदेश से आने वाले दर्शक हों या स्थानीय लोग सभी होलिका के इस दृश्य को देखने के लिए सांस थाम बैठे रहते हैं।  इतना ही नहीं इस दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए विदेशी पर्यटकों की टोली भी होली से पूर्व इस गांव में आ चुकी है। 
 
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