प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर हालत बिगड़ने के बाद निजी अस्पताल लाई गई गर्भवती को डाक्टरों के प्रयास के बाद भी बचाया नहीं जा सका। उसके घरवालों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र पर उसे पीएचसी स्टाफ की लापरवाही से दवा की ओवरडोज इंजेक्ट कर दी गई। उसकी हालत इंजेक्शन लगने के बाद ही बिगड़ी। सीएमओ ने मामले की जांच के लिए विभाग की टीम का गठन किया है।
नगला मीरा निवासी जितेंद्र वाल्मीकि की पत्नी पूजा को मंगलवार रात प्रसव पीड़ा हुई। एंबुलेस सेवा की मदद से उसे बुधवार सुबह तकरीबन पांच पीएचसी कागारौल में भर्ती कराया गया। पूजा के ससुर रमन का आरोप है कि यहां एक एएनएम ने पूजा को इंजेक्शन लगाया। कुछ ही क्षण बाद उसे घबराहट होने लगी। पूजा ने एक बच्ची का जन्म दिया। साथ ही नाल और गर्भाशय भी बाहर आ गए। पूजा की हालत गंभीर हो गई। एएनएम के भी होश उड़ गए। उसने तत्काल पूजा को लेडी लायल के लिए रेफर कर दिया। पूजा की स्थिति नाजुक देख चिकित्सकों ने उसे एसएन इमरजेंसी में भर्ती कराया। एसएन में भी चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए।
इसके बाद पूजा को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उनमें पीएचसी स्टाफ के प्रति रोष व्याप्त है। मामले में पीएचसी प्रभारी डा. डीपी सोलंकी ने बताया कि एएनएम के मुताबिक प्रसव करा दिया गया था। हालत गंभीर होने पर रेफर किया गया।
इस मामले की जांच के लिए टीम बना दी गई है। सुबह टीम मौके पर जाकर जांच करेगी। यदि स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही पाई गई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डा. एचएस दानू, सीएमओ