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एटा: गर्भवती महिला की बिगड़ी तबीयत, एंबुलेंस कर्मियों ने कराया प्रसव, जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित

Fri, 18 Mar 2022 12:39 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

एंबुलेंस से गर्भवती महिला को जिला महिला अस्पताल ले जाते समय उसकी तबीयत बिगड़ गई। एंबुलेंस को रास्ते में ही रोक कर कर्मियों ने प्रसव कराया। बाद में जच्चा-बच्चा को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया।
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102 एंबुलेंस (सांकेतिक फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गर्भवती को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाते समय रास्ते में तबीयत खराब हो गई, जिस पर एंबुलेंस कर्मियों ने प्रसव कराया। जच्चा-बच्चा को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों सुरक्षित हैं।  ब्लॉक शीतलपुर क्षेत्र के गांव अहमदाबाद निवासी प्रदीप कुमार की पत्नी सपना को बुधवार रात प्रसव पीड़ा हुई। प्रदीप ने 102 एंबुलेंस को फोन कर रात करीब 10 बजे बुलाया।

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परिजन सपना को एंबुलेंस से लेकर जिला महिला अस्पताल आ रहे थे, तभी गांव रामपुर घनश्याम के पास उसकी हालत बिगड़ गई। इस पर चालक जितेंद्र कुमार ने एंबुलेंस को रोक लिया। ईएमटी आनंद कुमार और चालक ने परिजन के सहयोग से एंबुलेंस में ही प्रसव कराया। बाद में जच्चा-बच्चा को एंबुलेंस से ही जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। 

प्राथमिक उपचार के लिए दिया जाता है प्रशिक्षण 

एंबुलेंस कार्यक्रम प्रबंधक विष्णु कुमार ने बताया कि एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी और चालक को हैदराबाद में प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि मरीज को लाते ले जाते समय किसी तरह की समस्या आ जाए तो प्राथमिक उपचार दिया जा सके। सभी एंबुलेंस पर प्रशिक्षित कर्मचारियों को समय-समय पर गाइडलाइन भी जारी की जाती हैं। खासतौर से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाते समय विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

एक साल में 43 गर्भवती महिलाओं की चली गई जान

एक साल में 43 गर्भवती महिलाओं की जान तमाम कारणों से चली गई। 12 महिलाओं ने प्रसव के लिए ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। वहीं छह महिलाओं की मौत घर पर और 25 की स्वास्थ्य इकाइयों पर प्रसव के दौरान हो गई। सुरक्षित प्रसव के दावों के बीच यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है। इस पर मंथन किया जा रहा है। समय से प्रसव पूर्व परीक्षण न कराना और उच्च जोखिम गर्भावस्था में रेफर करने पर अस्पताल न पहुंच सकने की बातें सामने आई हैं। 

मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए महकमा लोगों को जागरूक नहीं कर पा रहा है। जटिल और जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं की मौतें नहीं रुक पा रही हैं। विभिन्न कारणों से कुल 43 गर्भवतियों की मौत हुई है। इनमें 12 ऐसी थीं, जिनका प्रसव स्थानीय अस्पतालों में संभव नहीं था। उच्च अस्पताल के लिए रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में मौत हो गई। वहीं घरों पर प्रसव के दौरान छह महिलाओं की मौत हुई। सरकारी अस्पतालों में प्रसव करते समय 25 महिलाओं की जान चली गई। अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन न होने और प्रसव में जटिलताओं की बात सामने आ रही है।

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