भरगैन। कस्बे के मुहल्ला मीरन थोक स्थित अल्हाज सूफी शाह अब्दुल रशीद मियां चिश्ती साबरी के तीन दिवसीय उर्स का रविवार को कुल शरीफ के साथ समापन हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने मजार पर चादरपोशी कर देश में अमन-चैन की दुआ मांगी।
सज्जादानशीन कारी अब्दुल कय्यूम ने आपसी सौहार्द, अमन, खुशहाली और तरक्की की दुआ की। उन्होंने कहा कि लोगों को इबादत के साथ बुरी सोहबत से बचने की जरूरत है। आज युवा इस्लाम के संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। अगर हम पैगंबर साहब के मार्ग से भटकते हैं तो नुकसान ही नुकसान है। दुनिया चंद रोजा है जो फना होने वाली है। मरने के बाद इंसान के आमाल साथ देंगे इसलिए बुरे कामों से बचकर अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें।
नायब सज्जादानशीन हाजी इशराक अली ने कहा कि झूठ, चुगली, पीठ पीछे बुराई, किसी को गाली या धोखा देना, घमंड, फिजूलखर्ची जैसी बुराइयों को खत्म करने की जरूरत है। जेरे सरपरस्त हाजी अब्दुल लतीफ खान ने कहा कि इस्लाम गरीबों, यतीम और जरूरतमंदों के कल्याण की बात करता है। कार्यक्रम में संयुक्त रुप से समाजसेवी रिहान खान को सूफी चादर पहनाकर सम्मानित किया गया। उर्स कार्यक्रम में मुख्य अतिथि फीरोजाबाद स्थित खानकाह एक इमामुद्दीन के सरपरस्त समदानी मियां और सज्जादानशीन गुड्डू मियां रहे।