पिनाहट। पंचायत चुनाव समय पर न होने की स्थिति में निर्वाचित ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किए जाने की मांग के मद्देनजर क्षेत्र के ग्राम प्रधानों ने सोमवार को डीएम कार्यालय पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।
प्रधानों ने कहा कि ग्राम पंचायतें संविधान के तहत स्वायत्तशासी संस्थाएं हैं। ये लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला और जनभागीदारी की सशक्त कड़ी हैं। पूर्व में 20 दिसंबर 2020 से 25 मई 2021 तक प्रशासक नियुक्त किए गए थे। उस दौरान बैंकों से बड़ी धनराशि निकाली गई, जिसकी जांच लंबित है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। ज्ञापन में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड का उदाहरण दिया गया। इन राज्यों में देरी पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को ही कार्यवाहक प्रशासक बनाया गया था। प्रधानों ने संवैधानिक अधिकारों और जनकल्याणकारी भूमिका को देखते हुए यह मांग की। ज्ञापन पर रूमा देवी प्रधान ग्राम पंचायत अरनौटा, अजय कौशिक प्रधान ग्राम पंचायत रेहा, मायाराम प्रधान ग्राम पंचायत सुताह, दलवीर सिंह प्रधान ग्राम पंचायत राटौटी, राजेश कुमार, अभिषेक शर्मा, आशा देवी प्रधान ग्राम पंचायत विप्रावली सहित अन्य प्रधानों के हस्ताक्षर हैं।
संविधान में ग्राम पंचायतें
ग्राम पंचायतें भारतीय संविधान के भाग-9 (अनुच्छेद 243 से 243-ओ) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों से संपन्न स्वायत्तशासी संस्थाएं हैं। अनुच्छेद 243-बी, 243-सी, 243-ई एवं 243-जी पंचायतों को लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला के रूप में स्थापित करते हैं। पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि जनजीवन को सरल, सुलभ और विकासोन्मुख बनाने वाली जनभागीदारी की सबसे सशक्त कड़ी हैं।