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पावर ग्रिड ने हमें तो बर्बाद कर दिया

Wed, 02 Sep 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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पावर ग्रिड कारपोरेशन और प्रशासन के प्रति ग्रामीणों में गुस्सा यूं नहीं है। उनकी जमीन अधिग्रहण के वक्त अफसरों ने सब्जबाग दिखाए थे, लेकिन इसके बाद उनके लिए कुछ नहीं किया गया। हालात ये हैं कि वे जमीन बेचना भी चाहते हैं तो कोई खरीदने को तैयार नहीं है। खेतों में खंभे गड़े हैं। न तो वहां फसल ही हो पाती है और ना ही अब मकान बन सकते हैं। किसानों का कहना है कि ग्रिड ने उन्हें बर्बाद कर दिया है।
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कई किसान तो ऐसे हैं जिनके पास एक या दो बीघा खेत है। उनके खेतों में एक नहीं चार-चार खंभे गड़े हैं। एक खंभा करीब एक विस्वा जमीन को खराब कर देता है। सिंचाई करते वक्त करंट का डर बना रहता है।
सत्यप्रकाश रावत का कहना है कि इस जमीन को बेचना चाहें तो कोई खरीदेगा भी नहीं, क्योंकि जहां से इतनी हाईपावर लाइन गुजर रही हो वहां कोई निर्माण भी नहीं हो सकता है। उनका कहना है कि किसान चाहते हैं सरकार ही इस जमीन का अधिग्रहण कर ले।
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सीओ असीम चौधरी रहे निशाने पर
आगरा। सोमवार को हुए लाठीचार्ज का जिम्मेदार किसान क्षेत्राधिकारी सदर असीम चौधरी को मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब सभी किसान शांतिपूर्ण तरीके से गिरफ्तारी दे रहे थे तो सीओ असीम चौधरी ने जानबूझकर युवकों के साथ मारपीट की और माहौल को गरमाया। एक युवक ने अपनी चोटें दिखाते हुआ कहा कि पुलिस ने उसे गिराकर पीटा। पंचायत और पावर ग्रिड पर हुए प्रदर्शन में सीओ के खिलाफ नारेबाजी की गई। मंगलवार को सीओ असीम चौधरी मौके पर नहीं पहुंचे। हंगामे में मोर्चा सीओ छत्ता बीएस त्यागी को संभालना पड़ा। 
ग्रिड में तोड़फोड़ की सूचना पर दौड़ी पुलिस
आगरा। पावर ग्रिड के गेट पर किसानों का धरना चल रहा था। इसी बीच सूचना फैली कि नहर की ओर स्थित ग्रिड के गेट पर ग्रामीणों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी है। इस पर पुलिस, प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे लोगों से वार्ता की गई। उनसे कहा गया कि जब धरना शांति पूर्ण है तो तोड़फोड़ क्यों। इस पर प्रदर्शनकारी और पुलिस कर्मी नहर की ओर दौड़ पड़े। लेकिन सूचना गलत निकली।
जब पंचायत में महिला ने दिखाई चूड़ियां
आगरा। भैंटा गांव में पंचायत के दौरान उस समय युवा आक्रोशित हो गए जब वहां पहुंची एक मात्र महिला भारतीय किसान यूनियन की सदस्य राधा रानी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यहां भाषणबाजी करने से कुछ नहीं होगा। अपने हक के लिए लड़ना होगा। अगर आप लोगों में हिम्मत नहीं है तो चूड़ियां पहनकर बैठ जाओ, महिलाएं अपने बल पर ही प्रशासन और पुलिस से लोहा लेने को तैयार हैं।
हर हाथ में अमर उजाला
आगरा। पंचायत में तमाम लोग ऐसे थे जिनके हाथों में अमर उजाला अखबार था। वे सोमवार को किसानों पर हुए लाठी चार्ज की घटना की खबरें पढ़ रहे थे। पंचायत में कई वक्ताओं ने कहा कि अमर उजाला में प्रकाशित खबर पढ़कर ही उन्हें लाठी चार्ज की जानकारी हुई।

यदि किसानों को रिहा नहीं किया गया तो प्रशासन की ईंट से ईंट बजा देंगे। यही नहीं पावर ग्रिड को ठप कर दिया जाएगा। किसान अब अन्याय नहीं सहेगा।
- राधारानी

किसानों के साथ झूठे वायदे किए थे। एक तो पहले ही मुआवजे में गड़बड़ी की गई। अब जो फसल बर्बाद होती है उसका मुआवजा भी किसानों को नहीं मिलता है।
- सुरेश चंद्र
मेरे पास महज एक बीघा खेत है। उस पर भी कई टावर खड़े कर दिए गए हैं। फसल नहीं होती। बताइए परिवार का पालन पोषण कैसे किया जाए। कोई सुनने वाला नहीं है।
- जगमोहन सिंह
किसानों के साथ प्रशासन ने धोखा किया है। जब सभी किसान गिरफ्तारी देकर जेल जाने को तैयार थे तो लाठी चार्ज क्यों किया। गिरफ्तार नौ लोगों को प्रशासन रिहा करे या हमें भी गिरफ्तार करे।
- सत्य प्रकाश रावत
 जिन किसानों की जमीन गई है, उनके पास रोजगार का कोई दूसरा जरिया नहीं है। अब परिवार के सदस्य को नौकरी और मुफ्त बिजली की मांग कर रहे तो क्या गलत कर रहे हैं। जबकि किसानों से पहले यह वादा किया गया था।
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- जगदीश तोमर
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