पावर ग्रिड कारपोरेशन के गेट पर धरना दे रहे निहत्थे किसानों पर हुए लाठी चार्ज और गिरफ्तारी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के आह्वान पर मंगलवार को बहेंटा गांव में हुई महापंचायत में किसानों के तीखे तेवर देखे। इससे नेताओं की बोलती बंद हो गई। किसानों ने अफसरों से वार्ता का प्रस्ताव ठुकरा दिया और आरपार की लड़ाई का ऐलान किया। पंचायत छोड़कर पुलिस की लाठियों की परवाह किए बिना सभी किसान पावर ग्रिड के गेट पर धरना देने पहुंच गए। किसानों के साथ नेताओं को भी धरने पर बैठना पड़ा।
बहेंटा गांव में महापंचायत में सुबह आठ बजे से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। करीब 10:30 बजे तक 14 गांवों के अलावा आसपास के कई गांवों के किसान, भाकियू नेता, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में दावेदारी कर रहे नेता भी पहुंच गए थे। बसपा विधायक कालीचरण सुमन ने पुलिस की निंदा करते हुए गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई के लिए अफसरों से वार्ता करने और कोई निर्णय नहीं होने पर आंदोलन का प्रस्ताव रखा। सांसद चौधरी बाबूलाल ने भी पहले डीएम से मिलने, फिर मामले के हल के लिए दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से किसानों को मिलवाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि एक कमेटी बना लें, उसके बैनर तले आंदोलन चलाएं।
महापंचायत को तमाम वक्ताओं ने संबोधित किया। कुछ के तेवर नरम थे तो कुछ के गरम। लेकिन वहां मौजूद बड़ी संख्या में किसान और युवा अफसरों से वार्ता के प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए। उन्होेंने कहा कि किसान पुलिस की लाठियां से नहीं डरते। अब पावर ग्रिड कारपोरेशन के गेट पर ही धरना होगा, प्रशासन चाहे जो कार्रवाई करे। इस ऐलान के बाद किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों, दोपहिया वाहनों से ग्रिड के गेट पर पहुंच गए। किसानों के पीछे नेताओं को भी आना पड़ा और वे भी धरने पर बैठे।
महापंचायत में हावी रही स्थानीय राजनीति
महापंचायत में स्थानीय राजनीति भी हावी रही। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के आह्वान पर बुलाई गई महापंचायत में राजनीतिक दलों के लोग भी पहुंचे। बड़ी संख्या वे लोग भी थे जो इस क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान के चुनाव में दावेदारी कर रहे हैं। किसानों के इस आंदोलन में अपनी-अपनी भूमिका दिखाने के चक्कर में कोई एक राय नहीं बन पाई, लेकिन एक बात जरूर थी कि किसानों के समर्थन में तन, मन, धन से सहयोग करने के वादे खूब हुए।
2017 में साइकिल को तोड़कर फेंक देना: बाबूलाल
फतेहपुर सीकरी सांसद चौधरी बाबूलाल ने कहा कि किसान अपने आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ रहा है। जमीन बचाने के लिए लाठियां खानी पड़ेगी। इससे डरने की जरूरत नहीं है। किसान हित में मैंने खूब लाठियां खाई हैं। मिढ़ाकुर कांड आपको याद होगा, मेरा पूरा शरीर तोड़ दिया था। इस प्रदेश में गरीब, किसान की सुनने वाला कोई नहीं है। 2017 में आपको मौका मिल रहा है, आपको लगता है कि इस सरकार में आपके हितों की रक्षा हो रही है तो दोबारा चुन लेना, नहीं तो साइकिल को तोड़कर फेंक देना।
प्रदेश में गुंडों की सरकार : उपेंद्र सिंह
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने कहा कि हम किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। पहले भी किसानों के धरने में बैठे हैं। सांसद चौधरी बाबूलाल भी बैठे हैं। सभी के सहयोग से इन 14 गांवों की समस्या का निराकरण कराया जाएगा। प्रदेश सरकार से कोई उम्मीद करना बेमानी है। यहां तो गुंडा सरकार चल रही है। तभी तो लखनऊ में निहत्थे कांग्रेसी पीटे जाते हैं और प्रदेश में किसानों के साथ बर्बरता हो रही है।
पुलिस ने कानून हाथ में लिया : कालीचरण
बसपा विधायक कालीचरण सुमन ने कहा कि शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों को घेरकर जिस तरह से उन पर लाठियां बरसाई गईं, निंदनीय है। घटना के वक्त मैं भी वहां पहुंचा था। किसानों ने कानून हाथ में नही लिया, बल्कि पुलिस ने ही कानून ताक पर रख अमानवीयता की है।
हर तरफ क्यों पिट रही पुलिस : मोहन सिंह
किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज नहीं रह गया है। पुलिस और प्रशासन सपा सरकार के इशारे पर जनता का उत्पीड़न कर रहा है। जनता इससे आजिज आ चुकी है। अधिकारी कहते हैं कि जनता पुलिस को पीट रही है। आप खुद ही सोचिए की प्रदेश में हर तरफ पुलिस क्यों पिट रही है।
किसानों के साथ नहीं होने देंगे अन्याय: ओमप्रकाश
भाजपा नेता ओम प्रकाश चलनीवाले ने कहा कि किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। चाहे इसके लिए लखनऊ जाना पड़े या दिल्ली।
पावर ग्रिड की सुरक्षा को खतरा: सहायक प्रबंधक
पावर ग्रिड कारपोरेशन आफ इंडिया के सहायक प्रबंधक पंकज शर्मा का कहना है कि किसानों के आंदोलन से पावर ग्रिड को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 अगस्त की रात में भारतीय किसान यूनियन ने उग्र प्रदर्शन करते हुए उपकेंद्र की बाउंड्रीवाल को क्षति पहुंचाई है। उससे ग्रिड की सुरक्षा और प्रचालन में खतरा पैदा हो गया है। यह आठ लाख वोल्ट अति उच्च क्षमता वाली पारेषण लाइन है, जो असम और भूटान से इस उपकेंद्र को जोड़ती है। यदि यहां कोई गड़बड़ी होती है तो उत्तरी और पश्चिमी ग्रिड फेल हो सकता है। उन्होंने कहा है कि किसानों को जमीन की मुआवजा राशि, बोनस और वार्षिकी का भुगतान कर दिया है। सहमति पत्र पर किसानों के हस्ताक्षर भी हैं। विकास कार्यों के तहत गांवों में कंकरीट रोड, स्कूल, चिकित्सा शिविर, स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था कराई जाती है। उन्होंने कहा कि किसान मुफ्त बिजली और नौकरी की मांग कर रहे हैं लेकिन पावर ग्रिड की नियमावली में मुफ्त बिजली देने का कोई प्रावधान नहीं है। पावर ग्रिड का किसानों से ऐसा कोई समझौता भी नहीं है। किसानों को सोलर विद्युत सैट देने की पेशकश की गई थी, जो उन्होंने ठुकरा दी। सहायक प्रबंधन का कहना है कि किसानों के आंदोलन से ग्रिड और ग्रिड परिसर में रह रहे 60 परिवारों की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो गया है।