वर्तमान में 1200 बिजली चोरी के मुकदमे लंबित हैं। विशेष न्यायाधीश ने प्रमुख सचिव आलोक कुमार को पत्र में अवगत कराया है कि कानून को ताक पर रख कर बिजली चोरी के मामले दर्ज कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इंजीनियरों द्वारा घोर अनियमिताओं के साथ केवल गुडवर्क और ऊर्जा मंत्री को खुश और संतुष्ट करने के लिए कानून को नजरअंदाज किया जा रहा है।
विशेष न्यायाधीश ने प्रमुख सचिव को नौहझील थाने के चार केस की जानकारी भी भेजी है। इनमें से गांव नावली में मात्र तीन घंटे में बिजली इंजीनियरों ने 55 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी करते पकड़ा दर्शाया है। इस मामले में अदालत ने माना कि इतने कम समय में 55 लोगों को चेक नहीं किया जा सकता।
विद्युत इंजीनियरों ने यह रिपोर्ट चार महीने बाद दर्ज कराई। केस में चोरी का भार तक अंकित नहीं है। एक को छोड़कर सभी तहरीर फोटो स्टेट दी गईं।अधिकतर मुकदमे साक्ष्य विहीन हैं। इंजीनियरों द्वारा मरे हुए व्यक्तियों को भी नहीं बख्शा है। कोई अधिकारी साक्ष्य देने कोर्ट में हाजिर नहीं होता है ऐसे में
मुकदमों में सफलता नाउम्मीद होती है।
फिलहाल रिपोर्ट दर्ज कराने पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए विशेष न्यायाधीश ने सुझाव दिया है कि इन केसों के निस्तारण के लिए अलग से अधिवक्ता
रखा जाना चाहिए। विशेष न्यायाधीश द्वारा भेजे पत्र से विद्युत इंजीनियरों में खलबली मची हुई है। दक्षिणाचंल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एसके वर्मा ने विशेष न्यायाधीश द्वारा दिए गए सुझावों को अमल में लाते हुए 14 सूत्री निर्देश दिए हैं।