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एक्सक्लूसिवः शीतगृहों में डंप पड़ा है टनों आलू, बाजार में कीमतें मार रहीं उछाल

Mon, 19 Oct 2020 04:03 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दीपक जैन

सार

सामान्य तौर पर अक्तूबर माह में शीतगृहों में लगभग एक लाख मीट्रिक टन आलू शेष रह जाता है और इसकी निकासी दीपावली तक हो जाती है लेकिन बाजार में आलू की लगातार बढ़ रही कीमतों का असर है कि शीतगृहों से किसानों और बडे व्यापारियों ने आलू की निकासी रोक दी है। 
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Potato - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फुटकर बाजार में आलू के दाम कम नहीं हो रहे हैं। वर्तमान में बाजार में आलू 35 से 40 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। हालांकि जनपद के शीतगृहों में दो लाख 57 हजार मीट्रिक टन आलू अभी भी डंप है। जानकारों का कहना है कि शीतगृहों में डंप आलू यदि बाजार में आए तो आलू के दाम कम हो सकते हैं। 
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जनपद में शीतगृहों की संख्या 144 है। इन शीतगृहों में इस वर्ष नौ लाख 73 हजार मीट्रिक टन आलू स्टोर किया गया था। इन शीतगृहों में अभी भी दो लाख 57 हजार मीट्रिक टन आलू डंप है।


वहीं अक्तूबर माह तक अधिकांश आलू की निकासी हो जानी चाहिए। सामान्य तौर पर अक्तूबर माह में शीतगृहों में लगभग एक लाख मीट्रिक टन आलू शेष रह जाता है और इसकी निकासी दीपावली तक हो जाती है लेकिन बाजार में आलू की लगातार बढ़ रही कीमतों का असर है कि शीतगृहों से किसानों और बडे व्यापारियों ने आलू की निकासी रोक दी है। यूं तो यह आलू किसानों का है लेकिन बड़े व्यापारी निकासी से पहले ही किसानों से आलू का सौदा कर उसे खरीद लेते हैं और बाजार में अच्छा भाव मिलने पर आलू की निकासी करते हैं। 
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आलू के भाव के नियंत्रित करने के लिए भंडारण करने वाले सभी 144 कोल्ड स्टोरेज स्वामियों को तीस अक्तूबर तक आलू की निकासी कराने को कहा है। जनपद के कोल्ड स्टोरेज में अभी भी करीब दो लाख, 57 हजार मीट्रिक टन आलू का भंडारण है।  विनय कुमार - जिला उद्यान अधिकारी 

इस समय आलू की बुवाई चल रही है। शीतगृहों पर बीज निकालने के लिए किसान आ रहे है। आलू बीज निकासी के कारण इन दिनों डंप आलू की निकासी अधिकांश शीतगृहों से नहीं हो पा रही है। आलू के रेट अधिक होने के कारण इस बार भंडारण कम होना और बंगाल और गुजरात से आलू स्थानीय मंडी में न आना है। शीतगृहों में तीस प्रतिशत आलू ही रह गया है। निकासी के बाद नवंबर के पहले सप्ताह तक शीगृहों में लगभग 12 प्रतिशत आलू रह जाएगा।  राजीव जैन - अध्यक्ष शीतगृह एसोसिएशन 

अधिकांश किसान अपना आलू बेच चुके हैं। शीतगृहों में डंप आलू व्यापारियों का है। व्यापारी आलू तभी निकालते हैं जब उन्हें बाजार में मनमाफिक दाम मिलते हैं। इस बार आलू की पैदावार कम भी हुई है। इस कारण भी दाम बढ़े हुए हैं। बाजार में नया आलू आने पर दाम कम होने की उम्मीद है। आशीष नरायण शर्मा (नारखी) - आलू उत्पादक 
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त्योहार का समय पास आने के साथ ही किसान आलू की बुवाई में व्यस्त हो गया है वहीं गाड़ियों के भाडे़ भी मंहगे हो गये हैं। इस कारण आलू के दामों में एकदम से उछाल आया है। अब तक शीतगृह से लगभग 55 प्रतिशत निकासी हो चुकी है। शीतगृहों में अधिकाशत: आलू बीज का बचा हुआ है। अरुण कुमार सिंह-शीतगृह संचालक 

जनपद में आलू का रकवा - एक लाख 53 हजार हेक्टेअर 
शीतगृहों की संख्या - 144 
शीतगृहों में आलू का भंडारण - 9 लाख 73 हजार मीट्रिक टन 
शीतगृहों में डंप आलू - दो लाख 57 हजार मीट्रिक टन

 
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