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पुलिस ने दिखाई संवेदनहीनता, पूरे दिन शव लेकर गेट पर बैठे रहे परिजन, नहीं हो सका पोस्टमार्टम

Sat, 22 Jun 2019 12:25 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे मृतक के परिजन - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में एलआईसी एजेंट अशोक कुमार का शव शुक्रवार को दिन भर मोर्चरी पर रखे रहने के बावजूद पोस्टमार्टम नहीं हो सका। वजह रही पुलिस की संवेदनहीनता, जो सूचना के सात घंटे बाद पहुंची, वो भी पंचायतनामा के कागज लिए बगैर। 
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दो घंटे बाद पंचायतनामा भरा भी गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया। इस बीच अशोक कुमार के परिवारीजन पूरे दिन मोर्चरी के गेट पर शव लेकर बैठे रहे। पुलिस के न आने के कारण शव को मोर्चरी के अंदर भी नहीं रखा जा सका।

शमसाबाद के शंकरपुर निवासी अशोक कुमार (50) पुत्र मनीराम 16 जून को सड़क हादसे में घायल हो गए थे। एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान गुरुवार रात 11 बजे मौत हो गई। शुक्रवार सुबह नौ बजे परिजन शव को पोस्टमार्टम हाउस पर ले आए। 
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मृतक के भतीजे बैजनाथ ने बताया कि घटना थाना शमसाबाद क्षेत्र में हुई थी। इस कारण शमसाबाद थाना पुलिस को फोन से सूचना दे दी थी। पोस्टमार्टम गृह के कर्मचारियों ने बताया कि संबंधित थाना पुलिस के कागजात लाने पर ही शव को सिपाही खुद अंदर रखवा देंगे।

शाम को चार बजे थाना शमसाबाद से दो सिपाही आए। तब उनके पास पंचनामा के कागजात नहीं थे। बाद में कागजात भरकर उन्होंने शाम छह बजे शव को पोस्टमार्टम गृह के अंदर कक्ष में रखवाया। 

40 घंटे बाद हो सकेगा पोस्टमार्टम

अशोक कुमार की मौत गुरुवार रात 11 बजे हुई थी। शुक्रवार को देर से कागजी कार्रवाई होने के कारण शव का पोस्टमार्टम नहीं किया जा सका। शनिवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा।दोपहर में दो बजे डॉक्टर आते हैं। तब पोस्टमार्टम हो सकेगा। 

..तो क्यों नहीं दिया गया ताबूत

शव को रखवाने के लिए जहां पुलिस की ओर से कागजी कार्रवाई नहीं की गई, वहीं पोस्टमार्टम गृह के कर्मचारियों की ओर से भी कोई प्रयास नहीं किया गया। समिति को एक ताबूत शव रखने के लिए मिला हुआ है। इसमें भी शव को नहीं रखा गया।

थाना शमसाबाद के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार निर्वाल ने बताया कि सुबह 11 बजे जानकारी मिल गई थी। मृतक के परिजनों ने पहले शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया था। इस बारे में चिकित्सक को लिखकर दे दिया था। 

बाद में वह पोस्टमार्टम हाउस पर शव लेकर आए। शव को डॉक्टरों ने अंदर लेने से मना कर दिया। पंचायतनामा भरने की प्रक्रिया दोपहर में ढाई बजे पूरी कर ली गई थी। पोस्टमार्टम कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से बात की जा रही है।
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झूठ बोल रही है पुलिस 

मृतक के भतीजे बैजनाथ का कहना है कि पुलिस झूठ बोल रही है, हमने पोस्टमार्टम के लिए मना नहीं किया। पुलिस देरी से आई, इसी कारण से पोस्टमार्टम नहीं हो पाया और न शव मोर्चरी के अंदर रखा जा सका।

सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने कहा कि पोस्टमार्टम करने के लिए चिकित्सक तैयार थे, उनके पास पंचायतनामा नहीं था और शव के साथ पुलिस भी नहीं आई थी। चिकित्सकों ने परिजनों से पंचायतनामा लाने को कहा था, लेकिन वह लेकर नहीं आए।
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