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सरकारी सिस्टम ने किया ऐसा 'मजाक', पक्के घर की आस में बेघर हुआ गरीब परिवार

Sun, 03 Feb 2019 05:17 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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टूट पड़ा गरीब के मकान
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आगरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जर्जर घर को पक्का करने की आस में एक गरीब परिवार कच्चा आशियाना भी गवां बैठा। दरार पड़ी दीवारों पर टीनशेड में रह रहा गरीब परिवार अब किराये पर रहने को मजबूर है। 

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मोदी सरकार की जिस योजना से 50 हजार रुपये की पहली किस्त मिलने के बाद जर्जर दीवारें ढहाकर पक्के मकान की नींव रखी थी, उसी सरकार के एक विभाग के नियम आड़े आ गए। निर्माण कार्य रुका सो अलग, थाने में एफआईआर भी हो गई। 

यह मामला है ताजगंज, असदगली का। यहां के भवन संख्या 21/3 निवासी राजबहादुर का बीस वर्ग गज में छोटा सा मकान था। यह परिवार आर्थिक रूप से इतना कमजोर है कि सालों से दरार पड़ी दीवारों के बीच रह रहा था। 

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रिपोर्ट भी दर्ज

सर्दी, गर्मी, बरसात से बचने के लिए पक्की छत की बजाय टीनशेड का ही सहारा था। गरीब परिवार जैसे-तैसे गुजर-बसर कर रहा था। इसी बीच आसपास के कई लोगों को देख उसने भी प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर दिया। ताकि जर्जर दीवारों को ढहाकर छोटा सा पक्का निर्माण कर सके, जिससे परिवार महफूज रह सके। 

उसका आवेदन मंजूर भी हो गया और पहली किस्त के रूप में उसे 50 हजार रुपये भी मिल गए। हाथ में रकम आते ही उसने निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। पहले तो उसने पुरानी दीवारें तुड़वा दी। मगर, जैसे ही नई दीवारों के लिए नींव भरना शुरू किया तभी पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। उसने काम रुकवा दिया था। 

दरअसल, राजबहादुर का मकान ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में है। यह प्रतिबंधित दायरा है। इसमें कोई निर्माण नहीं हो सकता। एएसआई ने इस संबंध में उसके खिलाफ थाना ताजगंज में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। जर्जर मकान भी गिरने के बाद अब वह रहने के लिए भटक रहा है। 

अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. रामशंकर कठेरिया ने उसकी समस्या को देखते हुए निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने के लिए मंडलायुक्त को पत्र भी लिखा। पीड़ित अब कमिश्नरी कार्यालय के चक्कर काट-काट कर परेशान है। उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।
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