गोकुल बैराज से निकलने के बाद यमुना अस्तित्व के लिए जूझ रही है। जो यमुना 100 साल से आगरा की प्यास बुझा रही थी, अब वह खुद पानी के लिए प्यासी है। यमुना की तलहटी में रेत उड़ रही है। अवैध खनन से जख्मी यमुना कराह रही है। यमुना को लेकर 15 साल से कागजी कवायद चल रही है, लेकिन धरातल पर यमुना की हकीकत नहीं बदली। ये वही यमुना है जो यमराज की बहन है। कृष्ण प्रिया है। सूर्य पुत्री है। ब्रज के लिए जिसे जीवनदायिनी कहा जाता है, यह आज छलावों से पीड़ित है।
यमुना नदी पर 30 साल से बैराज नहीं बना। तीन मुख्यमंत्री और दो राज्यपाल बदल गए। शिलान्यास होने के बाद पत्थर भी गुम हो गए, परंतु यमुना लबालब नहीं हो सकी। 1987 से यमुना पर बैराज को लेकर कागजी रस्म अदायगी हो रही है।
पहली बार सूबे का मुखिया बनने पर 2017 में आदित्यनाथ योगी आगरा आए थे। नगला पैमा में रबर डैम का शिलान्यास किया था। आगरा किले के सामने रिवर फ्रंट बनाने की बात कही थी। पांच साल बाद भी न रिवर फ्रंट बना, न रबर डैम बन सका।
यमुना सत्याग्रही अश्वनि वशिष्ठ ने कहा कि यमुना शुद्धीकरण के लिए यमुना किनारा पर सत्याग्रह किया था। तब अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि नदी को निर्मल बनाएंगे। यमुना का कलरव लौटाएंगे, लेकिन कोई काम आज तक नहीं हुआ।
यमुना सत्याग्रही धीरज मोहन सिंघल ने कहा कि उच्च न्यायालय यमुना को जीवित प्राणी मान चुका है। इसके संरक्षण के लिए काम होना चाहिए। 20 साल से नेता व अधिकारी यमुना भक्तों के साथ छलावा करते आ रहे हैं।
रिवर कनेक्ट के संयोजक ब्रज खंडेलवाल ने कहा कि अहमदाबाद में साबरमती मॉडल पर यमुना का रिवर फ्रंट बनाने की मांग उठाई थी। पांच साल हो गए। सरकार ने यमुना के लिए कोई काम नहीं किया। यमुना भक्त रोज आरती कर रहे हैं।