आगरा में प्रदूषण के कारण अस्पतालों में अस्थमा और सांस के मरीज बढ़ रहे हैं। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) की ओपीडी दो नवंबर से ही शुरू हुई है। यहां पहले सांस के 15 से 20 मरीज प्रतिदिन आ रहे थे वहीं अब इनकी संख्या 60 तक पहुंच गई है।
चिकित्सकों के अनुसार हवा में खतरनाक गैस और धूल ने लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। दो-तीन घंटे खुले में रहने पर लोगों की हालत बिगड़ रही है। सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश हो रही है। अस्थमा-सांस रोगियों का मर्ज बिगड़ रहा है। रोजाना अस्थमा अटैक के तीन से पांच मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ रहा है।
वक्ष एवं सांस रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि पांच-सात दिन से प्रदूषण से पुराने मरीजों में मर्ज बिगड़ा हुआ मिला। इनकी डोज बढ़ाई गई, भर्ती भी कर रहे हैं। स्वस्थ लोगों में सीने में जकड़न, छींक, खराश की परेशानी मिली।
संकट : जुकाम-खांसी के मामले बढ़े
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि धूल-धुआं लोगों में एलर्जी पैदा कर रहे हैं, इससे जुकाम-खांसी और गले में खराश के मरीज दोगुने हो गए हैं। स्थिति यह है कि हर घर में एक मरीज है। ओपीडी फुल चल रही है। टेलीमेडिसिन में भी रोजाना 20 से अधिक नए मरीज फोन पर परामर्श ले रहे हैं।
समस्या : रोज कर रहे पांच मरीज भर्ती
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग की डॉ. कोमल लोहचब ने बताया कि हवा में नमी होने पर वाहनों का धुआं, धूल और हवा में खतरनाक गैस आसमान पर अधिक ऊंचाई पर नहीं जा पाती, बेहद नीचे इनकी एक परत बन जाती है, जिसके संपर्क में रहने से सांस के जरिये धूल-धुआं फेफड़ों में पहुंचते हैं। इससे सांस के रोगियों को अटैक आ रहा है। रोजाना तीन से पांच मरीज भर्ती कर रहे हैं। टीबी मरीजों का ज्यादा बुरा हाल है।
इन बातों का रखें ख्याल
- गुनगुना पानी पीएं, रोजाना भाप लें।
- डॉक्टरी परामर्श पर इन्हेलर की डोज बढ़ा दें।
- बिना मास्क और चश्मे के घर से बाहर न जाएं।
- गुनगुने पानी से गरारे करें
- शाम को दूध पीएं, गुड़ खाएं।