हवा में प्रदूषण से अस्थमा और सांस रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। कुछ लोगों को बलगम में खून भी आ रहा है। हालत खराब होने पर मरीजों को भर्ती कर ऑक्सीजन दिया गया। ऐसे मरीजों की दवा की खुराक भी चिकित्सक को बढ़ानी पड़ रही है।
वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि धूल-धुआं के अति सूक्ष्म कण नलिकाओं में पहुंचकर संक्रमण पैदा कर रहे हैं। ठंड होने पर ये सिकुड़ भी जाती हैं। इससे सांस लेने में परेशानी हो रही है। तेज खांसी और सांस फूल रही है। सांस और टीबी के मरीजों को खांसी के साथ बलगम और खून भी आ रहा है।
ओपीडी में आए 306 मरीजों में से 60 फीसदी को यही परेशानी मिली। वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि दवाएं बंद करने वाले मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। बाल रोग विभाग के डॉ. नीरज यादव ने बताया कि प्रदूषण से अस्थमा पीड़ित बच्चों की तकलीफ बढ़ गई है। ठंड लगने से वायरल निमोनिया के मरीज भी तेजी से बढ़े हैं। ओपीडी में आए 182 मरीजों में से 70 फीसदी को बुखार, खांसी, जुकाम और निमोनिया मिल रहा है। दवा देने के साथ गंभीर हाल के बच्चों को भर्ती किया है।
पर्चा-दवा और जांच के लिए लगी लंबी कतारें
सोमवार को ओपीडी में 3510 मरीज आए। इसमें सबसे ज्यादा मेडिसिन विभाग में 683, हड्डी रोग में 317, त्वचा रोग में 315 मरीज आए। पर्चा, डॉक्टर को दिखाने, दवा और रक्त की जांच कराने के लिए मरीजों को दो से तीन घंटे का समय लगा। नाई की सराय निवासी सुनील बघेल ने बताया कि पिताजी को घुटनों में दर्द था, दिखाने आए थे। बड़ी दिक्कत हुई।
इन बातों का रखें ध्यान
- अस्थमा मरीज धूल-धुआं वाले क्षेत्र में जाने से बचें, मास्क लगाएं।
- अस्थमा मरीज डॉक्टर से मिलकर इन्हेलर की डोज बढ़वाएं।
- सुबह शाम गर्म पानी की भाप लें।
- लकड़ी का अलाव न जलाएं। हीटर का उपयोग करें।