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बीमार बना रही ताजनगरी की जहरीली हवा

Mon, 05 Jun 2017 01:11 AM IST
अमर उजाला, अागरा
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ऐतिहासिक ईमारतों के टिकट का दाम दोगुना किया गया - फोटो : Getty
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ताज का जिक्र आए, तो मुंह से वाह निकलती है। पर्यटन के मानचित्र पर सितारे की तरह जो चमक रहा है ताजमहल लेकिन बात ताजनगरी की हो तो वाह नहीं, दर्द भरी आह निकलती है। प्रदूषण ने आब ओ हवा में जहर जो घोल दिया है। हवा सांस लेने लायक नहीं रही। पानी एक तो कम बचा है, और जो है, वह पीने योग्य नहीं है। नतीजा, लोग बीमार पड़ रहे हैं। बच्चों तक को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। हवा में हानिकारक तत्व मानक से तीन गुना हो गए हैं।
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पिछली सर्दियों में दिल्ली के बाद देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा आगरा। स्मॉग के दिनों में तो बच्चों से बड़ों तक के मुंह पर मास्क लग गए थे। पिछले महीने के प्रदूषण के आंकड़ों पर गौर करें हवा में पार्टिकुलेटेड मैटर (पीएम)-10 की मात्रा 157 से 170  माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। सर्दी में यह 200 के ऊपर पहुंच गया था।
सल्फर डाई ऑक्साइड ( एसओ 2) , नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड ( एनओ2) की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। अस्थमा के मरीजों की परेशानी का मुख्य कारण एसओ-2 बढ़ना माना जाता है। सल्फर की मात्रा बढ़ने से ताजमहल पीला पड़ रहा है। यह हाल तब है जबकि ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए दो दशक पहले ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) बनाकर इसमें आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और भरतपुर ( राजस्थान ) को शामिल किया गया । इसके तहत कारखानों पर पाबंदी लगाई गई। लेकिन अफसर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे। शहर में कई स्थानों पर रोजाना शाम को बड़ी मात्रा में कूड़ा करकट जलाया जाता है। इस कूड़े में प्लास्टिक, चमड़े की कतरन, सिंथेटिक रबर भी होती है। शहर में जूता निर्माण इकाइयों की अधिकता के कारण चमड़े की कतरन का निस्तारण जलाकर ही किया जाता है। इससे हवा जहरीली हो रही है। शहर में प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा सबसे खतरनाक तत्व हाइड्रोक्लोरिक पोलिविनाइल क्लोराइड है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी वीके शुक्ला ने बताया कि कूड़े में ऐसे सामान जलाए जाने से हवा में अघुलनशील तत्वों की मात्रा बढ़ रही है, जोकि ने केवल ताजमहल जैसी इमारतों बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।
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खतरे की घंटी
1 - 15 में से 11 ब्लॉक डार्क जोन में आ चुके हैं, भूमिगत जल लगातार कम हो रहा है।
2 - यमुना में खतरनाक रसायन पाए गए हैं, पानी पीना तो दूर नहाने तक में नुकसानदेय है।
3 - पेयजल शोधन के लिए मानक से 70 फीसदी ज्यादा रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है।
4 - यमुना में पानी कम होने से ताज को भी नुकसान, कीड़े कर रहे हमला, हरा हो रहा है ताज।
5 - जहरीली हवा से बढ़ रहे श्वांस रोगी, एसएन में दो साल में 20 फीसदी बढ़ चुके हैं।
6 - वायु प्रदूषण बढ़ने से देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो चुकी है ताजनगरी।

मुश्किल में जान, बेपरवाह निजाम
शहर के हवा और पानी में जहर घुल चुका है। कागजों में प्रदूषण रोकने के लिए तरह तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए हैं लेकिन हकीकत में निजाम नींद में है। कोई प्रतिबंध प्रभावी नहीं है। एनजीटी के आदेश तक का पालन नहीं हो पा रहा है।
- शहर से रोजाना 800 मैट्रिक टन कूड़ा निकलता है, इसमें से 50 से 60 फीसदी उठाया नहीं जाता, जला दिया जाता है।
- यमुना में प्रदूषण रोकने के लिए 400 करोड़ खर्च किए गए, लेकिन अभी भी नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं, जल विषैला हो गया है।
- सीवर और नाले के पानी के शोधन के लिए बनाई गई एसटीपी कारगर नहीं रही हैं। नालों की टेपिंग तक नहीं हो पाई है।
-  पिछले साल जिले में छह लाख पौधे लगाने का दावा किया गया, देखभाल के अभाव में ज्यादातर दम तोड़ चुके हैं।
- ईंट-भट्ठे शहर के आस पास से बंद हो चुके हैं लेकिन बाह क्षेत्र में अभी भी चल रहे हैं। पेठे की इकाइयां आबादी से शिफ्ट नहीं हो पाई हैं।
- कई इलेक्ट्रोप्लास्टिंग इकाइयां भी लगभग बंद कराई जा चुकी हैं लेकिन कुछ अभी भी प्रदूषण की मात्रा में इजाफा कर रही हैं।
- ताजनगरी में वर्ष 2010 से पूर्व की डीजल गाड़ियों का संचालन प्रतिबंधित है लेकिन यह पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो पाया है।


अक्टूबर 2015 में:
बोदला
पीएम 10          233.3
एसओ 2            6.1
एनओ 2           12.7
नुनिहाई
पीएम 10        260.3
एसओ 2           9.3
एनओ 2         15.1

जनवरी 2016
बोदला            
पीएम10     263.8
 एसओ2         7.02
 एनओ 2          14.2
नुनिहाई
 पीएम 2     282.2
 एसओ 2     10.23
  एनओ 2      18.8
 नवंबर 2016
 पीएम 10   198.0
 एसओ 2    10.6
 एनओ 2   15.4

नुनिहाई
पीएम 2    221.0
एसओ 2    11.8
एनओ 2    18.3

जनवरी 2017
बोदला         
पीएम 10                  209.5
एसओ 2                     8.0
 एनओ 2                  12.7
नुनिहाई
 पीएम 10              232.9
 एसओ 2               10.2
 एनओ 2               16.0

अप्रैल 2017
बोदला         
पीएम 10          158.7
एसओ 2           6.1
एनओ 2          9.4
नुनिहाई          
पीएम 10          170.7
 एसओ 2         8.0
 एनओ 2         11.8
(ये सभी आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में हैं)

एक लाख पेड़ों पर चला दी आरी
राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर मथुरा से लेकर में फिरोजाबाद तक बड़े पैमाने पर फ्लाईओवर, पुल, अंडरपास और चौड़ीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। तकरीबन चार साल से कराए जा रहे इन कार्यों ने आगरा परिक्षेत्र में ही एक लाख से ज्यादा हरे पेड़ों को लील लिया है। राजमार्ग प्राधिकरण ने हरे पेड़ों को अनुमति लेकर काट तो दिया लेकिन नये पौधे लगाने का काम बेहद ही सीमित तरीके से किया गया है। यही कारण है कि हाईवे के किनारे हरियाली दूर-दूर तक नजर नहीं आती है। बड़ी संख्या में हरे पेड़ों के कटान के कारण भी ताजनगरी में वायु प्रदूषण में इजाफा हुआ है। एनएचएआई के फरीदाबाद खंड के प्रोजेक्ट निदेशक मोहम्मद शफी बताते हैं कि हरे पेड़ों के स्थान पर पूरे राजमार्ग के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधे रोपे जाएंगे। कई स्थानों पर पौधरोपण किया भी गया है। इस कार्य में कुछ समय लग सकता है।

तीन स्थानों पर प्रदूषण की जांच
सीपीसीबी की ओर से आगरा में ताजमहल, रामबाग और नुनिहाई क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की जांच की जाती है। इन आंकड़ों से ही शहर की हवा की स्थिति को जाना जाता है।

वर्जन
पॉलीथिन के खिलाफ वृहत स्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। पर्यावरण के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसके अलावा स्वच्छता पर भी जोर देने के लिए कहा गया है।
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- के. राममोहन राव, मंडलायुक्त

 एयर क्वालिटी इंडेक्स
51 से 100 तक  --           संतोषजनक ( इसमें कोई परेशानी नहीं होती।
201 से 300 तक  --        खराब (इसम श्वांस रोगियों को सांस लेने में दिक्कत होती है )
301 से 400 तक --         बेहद खराब (इसमें रोगियों के साथ स्वस्थ मनुष्य को भी दिक्कतें पैदा होती हैं )
401 से 500 तक  --       अति संवेदनशील  ( इसमें सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है )
नोट - आगरा में एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब और बेहद खराब श्रेणी में रहता है।
                
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