मुस्लिम वोटों के लिए ध्रुवीकरण की बिसात
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सियासी बाजी जीतने के लिए हर दांव खेलने की जुगत के तहत सियासी दल अपनी-अपनी गोटी सेट करने में लगे हैं। वोटों के ध्रुवीकरण की बिसात बिछाई जा रही है। ऐसे में ब्रज क्षेत्र की लोकसभा सीटों पर मुस्लिम वोटरों की भूमिका अहम मानी जा रही है। इस बार मुस्लिम वोटों पर सपा, बसपा की नजर है। लोक कल्याणकारी योजनाओं का वास्ता देकर भाजपा भी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
ब्रज क्षेत्र के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी और एटा लोकसभा सीट पर चुनावी माहौल गरमाने लगा है। मथुरा में दूसरे और अन्य सीटों पर तीसरे चरण में चुनाव है। वोटों के धुव्रीकरण की जोर आजमाइश शुरू हो चुकी है। आगरा, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी है। 2019 में सपा और बसपा का गठबंधन था। माना जा रहा है कि तब मुस्लिम वोटर गठबंधन के साथ चले गए थे।
इस बार बसपा अकेले दम पर चुनाव मैदान में है। अब बसपा और सपा के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर जंग है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि मुस्लिमों के बीच इस बार यही हवा है कि जिस दल का उम्मीदवार भाजपा को हराने की स्थिति में होगा उसके साथ ही चले जाएंगे। फिर चाहे सपा हो या बसपा। वैसे इस बार सपा का कांग्रेस से गठबंधन है। ब्रज में कांग्रेस का उम्मीदवार सिर्फ मथुरा सीट पर है। शेष सीटों पर सपा के उम्मीदवार हैं।
आगरा सीट के समीकरण की बात करें तो यहां 37 फीसदी वोटर दलित और मुस्लिम ही हैं। आगरा लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्रों में बीएसपी का फोकस मुस्लिम मतदाताओं पर रहेगा। फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। करीब दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं का रूख ही हार-जीत तय करता है। इस वोट के बिखराव और एकजुट होने की स्थिति में समीकरण बदल जाते हैं। मैनपुरी में माना जाता रहा है कि मुस्लिम मतदाता सपा के पक्ष में जाते हैं।
इस बार बसपा ने भी ताकत लगा रखी है। ऐसे में मुस्लिम वोटों का विभाजन होगा या पहले जैसा रूख रहेगा अभी कहना मुश्किल है। एटा लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अनुमानित एक लाख से अधिक बताई जाती है। एटा लोकसभा क्षेत्र में एटा, सकीट, मारहरा, में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अन्य क्षेत्रों से अधिक है। जानकार बताते हैं कि इस सीट पर मुस्लिम भाजपा से मुकाबला करने वाले दल के साथ जाते रहे हैं।
सपा ने नाराज मुस्लिम नेताओं को मनाया
ब्रज क्षेत्र में फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। 2019 का चुनाव सपा हार गई थी जबकि 2014 में मोदी लहर में भी सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव जीत गए थे। प्रोफेसर रामगोपाल यादव के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। यही वजह है कि चुनाव की घोषणा से पहले ही सपा नेताओं ने जिले के नाराज मुस्लिम नेताओं को मना लिया।
सपा से नाराज होकर बसपा में गए पूर्व विधायक अजीम भाई की पार्टी में वापसी हुई। अजीम भाई की मुस्लिम मतों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। पार्षद कासिम सिद्दकी ने तो अक्षय यादव के खिलाफ मुस्लिम क्षेत्रों में होर्डिंग्स लगवा दिए थे। सपा नेताओं ने आवास पर जाकर उन्हें भी मना लिया।
जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्ता देकर भाजपा की भी नजर
मुस्लिम आबादी को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ खूब मिला है। ब्रज क्षेत्र में बहुत कम मुस्लिम मतदाता ही नौकरीपेशा हैं। अधिकांश छोटे-छोटे रोजगार से जुड़े हैं या कामगार हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ मुस्लिम महिलाओं को भी भरपूर मिला है।
भाजपा लाभार्थियों को अपना वोट बैंक मान रही है। पिछले चुनाव में मुस्लिम बाहुल्य बूथों पर भी भाजपा को वोट मिले थे। इसके पीछे बड़ी वजह फ्री राशन, आवास योजना और तीन तलाक का मुद्दा बताया गया था। इस बार भी भाजपा की नजर मुस्लिम गढ़ों पर है।