मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व सपा अखिलेश यादव।
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मिशन-2027 की बिसात बिछने लगी है। सभी दल अपने-अपने कील-कांटे तैयार कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होंगे। जिन्हें विधानसभा चुनाव का रिहर्सल माना जा रहा है। ऐसे में सूबे का सियासी संग्राम धार्मिक बनाम जातीय ध्रुवीकरण हो रहा है।
सत्तारूढ़ भाजपा और आरएसएस हिन्दुत्व के एजेंडे को धार दे रही है। अलीगढ़ प्रवास के दौरान आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने भेदभाव भुलाकर हिंदू समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जातीय संघर्ष कराने का आरोप लगाते हुए सपा को घेर रहे हैं।
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पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों को साधने में जुटी सपा
दूसरी ओर, राणा सांगा पर मचे सियासी घमासान के बाद समाजवादी पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों को साधने में जुटी है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि 2027 में यूपी का चुनाव धार्मिक ध्रुवीकरण बनाम जातीय ध्रुवीकरण होगा। जहां एक तरफ भाजपा हिन्दुत्व के एजेंडे पर आक्रामक है। हिंदू राष्ट्र का मुद्दा भी उछल रहा है। वहीं, सपा दलित, पिछड़ा व अल्पसंख्यक समाज को अपने पक्ष में एकजुट करने में जुटी है।
अखिलेश खेल रहे पीडीए कार्ड
विधानसभा चुनाव 2022 और लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में सपा काे बढ़त मिली। वोट प्रतिशत बढ़ा था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव जनसभाओं में अब जातियों का नाम लेकर पीडीए कार्ड खेल रहे हैं। वहीं, सीएम योगी पीडीए कार्ड की धार को कुंद करने के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं।
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किस करवट बैठेगा सियासी ऊंट
सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा। यह कहना अभी संभव नहीं। लेकिन, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एक तरह से सेमीफाइनल होगा। पिछले पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव में भाजपा शहर से लेकर गांव तक भगवा लहरा चुकी है। पंचायत चुनाव 2026 में प्रस्तावित हैं। करीब छह माह का कार्यकाल बचा है। अप्रैल 2026 में बोर्ड परीक्षाएं होंगी। ऐसे में इस साल के अंत तक पंचायत चुनाव की घोषणा हो सकती है।