दिनेश ने जून 2016 में एक युवती को गोली मार दी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पहले मामला हत्या के प्रयास में दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में यह हत्या में तरमीम कर दिया गया। पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उसे गिरफ्तार किया था। दिनेश करीब तीन साल से जिला जेल में निरुद्ध है।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ एस चंद्रा ने बताया कि मिर्गी का दौरा आने जैसे मामलों में मरीज को खुला छोड़ा जाता है। उसे पकड़ते भी है तो ऐसे कि उसे चोट न पहुंचे। मिर्गी के दौरे के बाद मरीज भागने की स्थिति में नहीं रहता, लेकिन बंधे होने के दौरान अगर उसे दोबारा अटैक पड़ता तो उसे चोट भी आ सकती थी।
जेल अधीक्षक पीपी सिंह ने बताया कि दिनेश को चार दिन से बुखार था, उसे जेल में इलाज दिया जा रहा था। वो बार बार बाहर इलाज कराने की जिद कर रहा था। बुधवार को अचानक मिर्गी के दौरे पड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उन्होंने कहा कि उसका केस लगभग फाइनल होने को है, ऐसे में शंका थी कि वो कहीं भाग न जाए। हालांकि जंजीर में बांधकर इलाज कराने की जानकारी नहीं है, अगर ऐसा है तो मामले की जांच कराई जाएगी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संस्थान के अध्यक्ष शिवम विश्नोई ने बताया कि कोई भी व्यक्ति कैदी हो या आम आदमी किसी के साथ भी इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। जिला अस्पताल एटा में बंदी को जंजीर से जकड़ कर इलाज कराया गया।
यह मानवाधिकार उल्लंघन का मामला है। पुलिस को सुरक्षा के और इंतजाम करने चाहिए थे, लेकिन बंदी का इस तरह से उत्पीड़न नहीं करना चाहिए था। इस मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से मिलकर मामला उनके संज्ञान में लाया जाएगा।