मैनपुरी। जिला कारागार से छह जनवरी को पेशी पर आए बंदी ने एडीजे-4 के कोर्ट में खुद के पैर में गोली मार ली थी। इस मामले में एसपी ने कोर्ट ड्यूटी पर तैनात दस पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। मंगलवार को सभी पुलिसकर्मी बहाल कर दिए गए।
थाना करहल क्षेत्र के गांव जलालपुर निवासी 32 वर्षीय मनीष यादव जमीन के विवाद में पिता सुखराम, सौतेली मां सुषमा और भाई अभिषेक की हत्या के मामले में जेल में निरुद्ध है। छह जनवरी को वह दीवानी में पेशी पर आया था। वहां उसने पत्नी और मामा की मदद से एक तमंचा की व्यवस्था करने के बाद अपने बहनोई को फंसाने के उद्देश्य से एडीजे-4 की कोर्ट में खुद को गोली मार ली थी। पूरे मामले में एसपी अजय कुमार पांडेय ने जांच की। जांच में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की लापरवाही उजागर होने पर प्रभारी न्यायालय सुरक्षा अतिरिक्त निरीक्षक मुकेश मलिक, प्रभारी सदर हवालात ड्यूटी निरीक्षक विजय कुमार गौतम, हवालात ड्यूटी उप निरीक्षक अजय प्रताप, मुख्य आरक्षी एलआईयू विजय सिंह के अलावा महिला आरक्षी कुसुम चाहर, मुख्य आरक्षी रमाकांत उपाध्याय, आरक्षी सत्यवीर सिंह, प्रदीप राजा, योगेंद्र सिंह तथा आरक्षी एलआईयू दिलीप कुमार को निलंबित कर दिया गया था।
इन्हीं में सात के विरुद्ध ड्यूटी में लापरवाही, वारदात में संलिप्तता की संभावना के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि न्यायालय से सभी सात पुलिसकर्मियों को जमानत मिल गई थी। जांच के दौरान अपराध में संलिप्तता के आरोप असत्य पाए गए। सभी पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त पाए जाने के बाद एसपी अजय कुमार पांडेय ने फिर से बहाल कर दिया है।
जांच के दौरान अपराध में संलिप्तता आदि आरोप असत्य पाए गए। इस वजह से निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों को फिर से बहाल किया गया है।
ओमप्रकाश सिंह, एएसपी