आगरा में एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ खंदौली के सेमरा गांव में सवर्णों की महापंचायत को पुलिस ने नहीं होने दिया। पुलिस ने रविवार सुबह से ही पंचायत स्थल को कब्जे में ले लिया और गांव की ओर जाने वालों रास्तों को सील कर दिया।
सवर्णों ने गुपचुप तरीके से गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित मंदिर में पंचायत की, लेकिन वहां भी पहुंचकर पुलिस ने पंचायत को रुकवा दिया। आयोजकों ने सांसद को क्षेत्र में न घुसने देने का एलान किया और आठ दिन बाद फिर से पंचायत बुलाई है।
खंदौली की बाईसी (क्षेत्र के क्षत्रिय बहुल करीब 22 गांव) ने एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ सेमरा गांव में महापंचायत का एलान किया था। सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थन जुटाया जा रहा था। महापंचायत की भनक लगते ही प्रशासन सक्रिय हो गया।
आयोजन स्थल पर कब्जा
आयोजन स्थल पर तैनात पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार रात से ही गांव में धारा 144 लगा दी गई। सुबह से प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और खुफिया विभाग ने गांव में डेरा डाल दिया। गांव की ओर आने वाले मार्गों को सील कर दिया गया। आयोजन स्थल (रामलीला मैदान) पर भी पुलिस ने कब्जा कर लिया। जो लोग रामलीला मैदान में पहुंचे थे, उन्हें पुलिस ने लाठियां फटकार कर भगा दिया।
ऐसी स्थिति में आयोजकों ने पंचायत में आए लोगों को गुपचुप तरीके से एकत्र किया और गांव से करीब एक किमी दूर स्थित मां आशापूर्णा मंदिर में पंचायत शुरू कर दी लेकिन वहां भी पुलिस के अधिकारी पहुंच गए। उन्होंने पंचायत रोकने का फरमान सुनाया तो ग्रामीणों से झड़प भी हुई। काफी जद्दोजहद के बीच पंचायत की औपचारिकता पूरी की गई।
आठ दिन बाद फिर करेंगे आयोजन
मंदिर के बाहर खड़ी ग्रामीणों की भीड़ और पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
आशापूर्णा मंदिर में हुई पंचायत के दौरान आयोजक डॉ. चंद्रपाल सिंह परमार, चौकड़ा के कौशलेंद्र चौहान ने कहा कि भाजपा ने सवर्णों के साथ छलावा किया है। उन्होंने कहा कि सांसद राम शंकर कठेरिया को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा।
उन्होंने विधायक रामप्रताप सिंह और ब्लाक प्रमुख के खिलाफ भी गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि वे सवर्ण होने के बावजूद सवर्ण हितों का ध्यान नहीं रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि आठ दिन बाद दोबारा महापंचायत की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से पंचायत कर रहे थे लेकिन पुलिस ने जबरन उनकी पंचायत में खलल डाला है।
आयोजकों के घर पुलिस की दबिश
सेमरा में महापंचायत की सूचना पुलिस अधिकारियों को शनिवार की रात को ही हो गई थी। महापंचायत को रोकने के लिए पुलिस ने आयोजकों के घर दबिश दी। पुलिस ने उनके परिवार वालों को भी चेतावनी दी कि पंचायत न करें। पंचायत के बाद भी पुलिस ने छह लोगों को गुपचुप तरीके से हिरासत में लिया। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
एसपी ग्रामीण अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि क्षेत्र में धारा 144 लागू है। बिना अनुमति के पंचायत की जा रही थी। इसलिए पुलिस ने रुकवाया था। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था लेकिन पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।