प्रारंभिक जांच का सच
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मंदिर के ट्रस्ट और समिति को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चला आ रहा है। पुलिस यह पता लगा रही है कि वर्तमान में मंदिर का वैधानिक संचालन किसके पास है। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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2019 में पंजीकृत हुआ था ट्रस्ट
ट्रस्ट सेवा समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि वर्ष 2019 में उनके ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ था। उनका आरोप है कि बाद में दूसरी समिति बनाकर विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने इसकी शिकायत चिटफंड कार्यालय में की, जहां से दो बार नोटिस भी जारी हो चुके हैं।
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पुलिस ने जारी किए फिलहाल के लिए ये निर्देश
उनके अनुसार, वर्ष 2021 और 2023 में ग्रामीणों की पंचायत के बाद उन्हें मंदिर संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने फिलहाल किसी नए व्यक्ति को मंदिर संचालन में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए हैं। उनको पुलिस ने जानकारी लेने के लिए बुलाया था।
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