घर के बाहर गाड़ी खड़ी कर रहे हैं या फिर सर्विस सेंटर पर भेज रहे हैं तो उसकी सुरक्षा का भी ख्याल रखें। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं कि लखनऊ, सीतापुर और बस्ती का हाईटेक वाहन चोर गिरोह ऐसी ही गाड़ियों को निशाना बना रहा था। यह खुलासा बुधवार को थाना लोहामंडी पुलिस ने गिरोह के 8 सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद किया है। ऑन डिमांड कार चोरी के बाद आधी से कम कीमत में बेच देते थे। उनसे 1.86 करोड़ कीमत की 11 गाड़ियां भी बरामद की गईं।
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि वाहन चोर सर्विस सेंटर के कर्मचारियों की मदद से सर्विस के लिए आने वाली कारों की रिमोट चाबी की प्रोग्रामिंग कॉपी कर लेते थे। इसके बाद कार की लोकेशन पता कर उसे चोरी करते थे। जिन गाड़ियों में जीपीएस डिवाइस डिवाइस होती थी, वह उसे चोरी के बाद शहर से बाहर निकलते ही हटा देते थे। गिरफ्तार आरोपियों ने दिल्ली, मथुरा और आगरा में कारों की चोरी की हैं। 25 लाख की कार को 12 से 15 लाख रुपये तक में बेच देते थे। इसके लिए कंडम हो चुकी कारों के कागजातों का प्रयोग करते थे।
सत्यापन के बहाने सरगना के घर पहुंची थी पुलिस
एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि 29 जून को जयपुर हाउस निवासी अर्चित बंसल की होंडा डब्ल्यूआरवी गाड़ी चोरी हुई थी। उन्होंने कार को घर के बाहर खड़ा किया था। 30 जून की तड़के कार चोरी कर ली गई। थाना लोहामंडी में चोरी की प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने कॉलोनी के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। चोरों ने उपकरणों से कार का लॉक खोल लिया। उसका सायरन तक नहीं बजा।
शहर से बाहर निकलते ही उसकी लोकेशन नहीं मिली। जीपीएस को हटा दिया था। एक संदिग्ध कार भी घटना वाली जगह पर नजर आई। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों से कार के जाने वाले रूट को देखा। वह लखनऊ एक्सप्रेस वे होते हुए हरदोई की तरफ गई थी। यहां की बावन चुंगी, बावन रोड निवासी अभिषेक वाजपेयी के घर पहुंची। उस पर कार चोरी की कई प्राथमिकी दर्ज थीं। इस पर पुलिस उसके घर दक्ष एप में सत्यापन के बहाने पहुंची। वह घर नहीं मिला।
लखनऊ एक्सप्रेस वे पर पुलिस को दे गया था गच्चा
शुक्रवार दोपहर को पुलिस ने अभिषेक और उसके साथी को लखनऊ एक्सप्रेस वे के फतेहाबाद टोल पर घेर लिया था। मगर वो कार को बैक गियर में ले जाने के बाद भाग गया था। सात किलोमीटर तक कार दौड़ाई थी। इसके बाद कार को खड़ा कर साथी के साथ खेतों में भाग गया था। पुलिस को उसकी गर्लफ्रेंड मिली थी। उससे पुलिस ने जानकारी ली थी। युवती को यह नहीं पता था कि प्रेमी वाहन चोरी करता है। उससे कुछ नंबर ले लिए।
इनकी हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने सत्यम यादव (छिताैडा, पोस्ट कबरा, थाना सिंधाैली, सीतापुर), विवेक रावत (गोहना, थाना इंटोजा, लखनऊ), संतोष कुमार (गांव मुहरहिया, कुपरा, थाना नगर, बस्ती), रंजीत यादव (गांव जगदीशपुर, पोस्ट दुधोरा, थाना कोतवाली, बस्ती), अजय पाल (गांव दुधोरा, थाना कोतवाली, बस्ती), रविकांत (लोहिया नगर, नगर पंचायत, गणेशपुर, थाना वाटरगंज, बस्ती), अनुभव त्रिपाठी (असरफ टोला, थाना शहर कोतवाली, हरदोई), पंकज कुमार (महुरहिया, पोस्ट पुखरा, बस्ती) को गिरफ्तार किया। विवेक पर 19 प्राथमिकी दर्ज हरदोई, बरेली, लखनऊ, बस्ती, कुशीनगर में दर्ज हैं।
भागे हुए आरोपी
अभिषेक वाजपेयी वाजपेयी उर्फ सत्यम (बावन चुंगी, बावन रोड, थाना कोतवाली, हरदोई), पेंटर उर्फ फैजान (शाहजहांपुर), अभिनव (सत्यम का भाई), श्याम किशोर (सत्यम का पिता) और प्रिंस भागे हुए हैं।
बरामद कारें
2 टाटा हैरियर, 1 होंडा सिटी, 1 थार, 1 होंडा डब्ल्यूआरवी, टाटा नेक्सान, किआ कारेंस, वर्ना, इको स्पोटर्स, आई-20, टाटा पंच बरामद हुई हैं। इसके अलावा 19 पंजीकरण प्रमाण पत्र, 13 हजार रुपये, 9 मोबाइल आरोपियों से मिले हैं। कारों की कीमत 1.86 करोड़ है।
गैंग में सबके हिस्से थे अलग-अलग काम
पुलिस ने बताया कि आरोपियों का संगठित गिरोह है। इसमें हर किसी का काम बंटा हुआ था। कोई पांचवीं पास है तो किसी ने बीए किया है। सरगना अभिषेक, संतोष, सत्यम और विवेक डिवाइस की मदद से कार को हाईटेक लॉक खोल लेते हैं। संतोष का एसडी कार बाजार के नाम से बस्ती में पुरानी कारों की खरीद और बिक्री का काम है। उसका भाई पंकज भी साथ देता है। रविकांत चोरी की गाड़ियों को छिपाता था। अनुभव एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाता था। अजयपाल की आरटीओ में सेटिंग रहती है। वह कागज तैयार करता था। आरोपी कंडम हो चुकी गाड़ियों के कागजात खरीद लेते थे। इसके बाद उस नंबर की कार का रजिस्ट्रेशन, चेसिस और इंजन नंबर चोरी की गई गाड़ी पर डाल देते थे। बाद में कार को आधी कीमत पर बेच दिया जाता था। काफी समय से आरोपी यह काम कर रहे हैं। अब तक कितनी गाड़ियों की चोरी कर चुके हैं। यह उन्हें पता नहीं है।
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