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Agra: हर मामले में होती है लीपापोती, पहली बार दर्ज हुआ मुकदमा; खाकी पर वसूली और पिटाई सहित कई बार लगे अन्य दाग

Mon, 08 Jan 2024 03:05 PM IST
भूपेन्द्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

पुलिसिया उत्पीड़न के हर मामले में लीपापोती होती है। पहली बार मुकदमा दर्ज हुआ है। खाकी पर वसूली और पिटाई सहित कई बार अन्य दाग लग चुके हैं। 
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जगदीशपुरा थाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में जगदीशपुरा पुलिस ने एक परिवार को फर्जी मुकदमे में जेल भेज दिया। इसके बाद जमीन पर कब्जा किया गया। पुलिसिया उत्पीड़न का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पुलिस पर कई आरोप लग चुके हैं। मगर, कार्रवाई के नाम पर हर मामले में सिर्फ लीपापोती ही की गई। पहली बार मुकदमा दर्ज किया गया है, लेकिन गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है।

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अप्रैल 2023 में जगनेर के गांव नौनी निवासी मनोज शर्मा को सरेंधी चौकी पर लाकर पीटा गया था। आरोप लगा था कि पुलिस ने रुपयों की मांग की थी। पत्नी को एनकाउंटर का भय दिखाया था। इस पर मनोज की पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। मामले में निलंबन की कार्रवाई की गई। मगर, मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

थाना शाहगंज पुलिस ने 20 जून 2023 को दबिश देकर व्यापारी पिता-पुत्र और भतीजे को पकड़ा था। हवालात में पहले से बंद युवकों से पिटाई कराई थी। व्यापारी परिवार से कोरे कागजात पर हस्ताक्षर कराए गए। व्यापारी की किनारी बाजार स्थित दुकान का बैनामा कराया गया। इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। निरीक्षक को लाइन हाजिर किया गया।

ये भी हैं मामले

  • दिसंबर 2023 में ट्रांस यमुना थाना में तैनात महिला दरोगा बिना वर्दी के टेढ़ी बगिया से ई-बस में रामबाग जा रही थीं। रास्ते में टिकट को लेकर परिचालक से विवाद हुआ था। उन्होंने परिचालक की पिटाई की थी। वीडियो वायरल हुआ। इस पर लाइन हाजिर हुईं।
  • जून 2022 में फाउंड्री नगर पुलिस चौकी पर सादाबाद के कारीगर को लाकर पिटाई के आरोप लगे थे। चौकी प्रभारी और दो सिपाहियों को निलंबित किया गया। बाद में क्लीन चिट दी गई।

वेतन से होगी मुआवजे की भरपाई

पीड़ित को गलत फंसाने पर मानवाधिकार आयोग की धारा 18 सी के तहत पीड़ित को सरकार से मुआवजा दिलाने के लिए आयोग आदेश पारित करता है। मुकदमा पुलिस की ओर से लिखाया जाता है, सरकार दोषी पुलिसकर्मियों के वेतन से मुआवजे की भरपाई करेगी। पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का भी प्रावधान है। - नितिन वर्मा, मानवाधिकार कार्यकर्ता

फंसेगी कई लोगों की गर्दन

  • मामले की जांच के लिए डीसीपी सिटी की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया है।
  • एसआईटी में अपर पुलिस उपायुक्त अपराध के अलावा तीन निरीक्षक को रखा गया है।
  • एसओ को किसने फोन किया, सांठगांठ करने के लिए कौन आया, पैसों का लेन-देन हुआ तो कहां और कितने का हुआ, पता किया जाएगा।
  • गांजा और शराब बरामद दिखाई गई, आखिर यह कहां से लाए गए, थाने में रखे थे या फिर बाजार से लाए। पता करेंगे।
  • साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे, जमीन पर कब्जा हुआ तो कई लोगों की संलिप्तता रही होगी।
  • रवि कुशवाह और शंकरलाल कुशवाह का सामान आखिर किसने उठाया।
  • पुलिस पीड़ित परिवार के सामान की बरामदगी के प्रयास करेगी।
  • साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमे लिखने से लेकर गिरफ्तारी तक की जाएगी।
  • आबकारी निरीक्षक ने शराब बरामदगी की, उन्हें किसी ने सूचना दी होगी, वह कौन हैं, निरीक्षक ने पड़ताल की या फिर कागजी खानापूर्ति की, पता किया जाएगा।
  • जिस जमीन पर कब्जा हुआ, वहां पर कैमरे भी लगाए गए, वहां पर क्या-क्या गतिविधि हुई, यह कैद हो गया होगा। फुटेज देखी जाएगी।
  • पुलिसकर्मियों के साथ शामिल लोग कौन है, पता किया जाएगा।
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