आगरा। थाना सिकंदरा पुलिस पर महिला ने हिरासत में पिटाई के आरोप लगाए थे। कोर्ट ने मेडिकल में आईं चोटों के आधार पर तीन दरोगा और एक सिपाही के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए थे। मामले में मंगलवार को पुलिस की ओर से सत्र न्यायालय में रिवीजन दाखिल किया गया है। इसमें महिला आरोपी के आरोपों को निराधार बताया है। दूसरे पक्ष ने भी जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। इस पर 11 जून को सुनवाई होगी।
पुलिस की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फाैजदारी राधा कृष्ण गुप्ता और देवी सिंह सोलंकी ने सत्र न्यायालय में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। इसका आधार बताते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने आरोपी सीमा सिकरवार को उनके निवास स्थान से नियमानुसार गिरफ्तार किया था। गैर जमानती वारंट से भी अवगत करा दिया था। इस प्रकिया में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किया। मानवाधिकार और महिला सुरक्षा से संबंधी नियम का पालन किया। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज भी देखे जा सकते हैं। इस आधार पर 6 जून का कोर्ट का आदेश अपास्त करने की प्रार्थना की। कोर्ट में सुनवाई के दाैरान सीमा सिकरवार पक्ष भी पहुंच गया। उन्होंने मामले में अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख दे दी।
यह था मामला
महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में मारपीट, गालीगलाैज सहित अन्य धारा में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इस पर गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। मामले में थाना सिकंदरा पुलिस ने आरोपी महिला को 4 जून को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में 5 जून को पेश करने के दाैरान अधिवक्ताओं ने हंगामा किया था। महिला ने पुलिस पर पिटाई के गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट ने बोर्ड से मेडिकल के आदेश दिए। इसमें 3 चोटों की पुष्टि होने पर प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बटेश्वर कुमार ने तीन दरोगा सुरजीत सिंह, निलेश शर्मा, नेहा और हेड कांस्टेबल सीमा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए थे।