कोरोना के चलते राजकीय मुड़िया मेला निरस्त हो गया है। परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं की परिक्रमा रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस का सख्त पहरा है। इसके चलते पांच दिवसीय मेला पर आस्था और भक्ति से सराबोर रहने वाली गिरिराजजी तलहटी अब सूनी नजर आ रही है।
पांच दिवसीय मुड़िया पूर्णिमा से पूर्व देवशयनी एकादशी, द्वादशी के दिन परिक्रमा मार्ग में लाखों श्रद्धालु भक्त आस्था और भक्ति में लीन होकर गिरिराज प्रभु की परिक्रमा करते थे, लेकिन इस बार मुड़िया मेला निरस्त करने के चलते श्रद्धालु भक्तों के कदम गिरिराज परिक्रमा की ओर नहीं बढ़ सके हैं। कोरोना महामारी के चलते जिला प्रशासन ने मुड़िया मेला निरस्त कर दिया है। यहां श्रद्धालु भक्तों के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी है। पुलिस और मजिस्ट्रेट सीमा क्षेत्रों में निगरानी कर रहे हैं। बुधवार को उप मेलाधिकारी एसडीएम राहुल यादव और सीओ रविकांत पाराशर ने परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण कर राजस्थान सीमा क्षेत्रों का भ्रमण किया। राजस्थान की ओर से परिक्रमा को आने वाले श्रद्धालु भक्तों को वहीं से वापस लौटा दिया।
भक्त न आने से मंदिर सूने
भक्तों का आवागमन न होने से विश्व प्रसिद्ध मुखारबिंद मंदिर जतीपुरा, दानघाटी और मुकुट मुखारबिंद मानसी गंगा मंदिर सूने पड़े हैं। मंदिरों में पुजारी को ही आराध्य प्रभु के शृंगार, राज भोग, बाल भोग, आरती, शयन आरती आदि सेवा पूजा के लिए प्रवेश की अनुमति दी गई है। श्रद्धालु भक्त न आएं इसके लिए मंदिरों के पट प्रशासन ने बंद करा रखे हैं।
24 को निकलेगी मुड़िया शोभायात्रा
गुरु-शिष्य परंपरा का उदाहरण बनी गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई को श्रीराधा श्यामसुंदर मंदिर से परंपरानुगत मुड़िया शोभायात्रा ढप, ढोल, मृदंग, हारमोनियम, झांझ, मंजीरा संकीर्तन के साथ सुबह 9 बजे निकाली जाएगी। इससे पूर्व 23 जुलाई को मुड़िया संत सिर मुंडन करा कर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। जानकारी मुड़िया संत रामकिशन दास ने दी है।
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