एत्माद्दौला थाना पुलिस ने कालिंदी विहार निवासी युवक अजय सिसौदिया को ठगी के दो मामलों के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसके पकड़े जाते ही दस और मामले आ गए। इतना ही नहीं। इन लोगों ने बताया कि कॉलोनी के ही 50 लोगों को इसने ठगा है।
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यह बैंक में अपनी जान पहचान बताकर सभी से क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए कागजात ले गया था। कार्ड बनवाकर सभी से कह दिया कि बने नहीं जबकि कार्ड अपने पास रख लिए।
उन पर लाखों का लोन ले लिया। बैंक के नोटिस लोगों के पास आए हैं। यह भी खुलासा हुआ कि इसमें बैंक का कर्मचारी और अजय के रिश्तेदार भी शामिल रहे। वे फरार हैं।
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पुलिस के पास कालिंदी विहार से सात दिन में दो शिकायतें आईं। पहले शिव दीपक पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्होंने क्रेडिट कार्ड बनवाया नहीं है और एचडीएफसी बैंक शाखा ने 75 हजार के लोन का नोटिस दिया है। इसी तरह इंद्रा गुप्ता पहुंची। उन्होंने बताया कि क्रेडिट कार्ड मिला नहीं और बैंक कह रहा कि कार्ड से 56 हजार निकाले हैं।
उनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि पड़ोस का युवक अजय सिसौदिया दोनों से क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए पासबुक, चेक और अन्य कागजात ले गया था। पुलिस ने अजय को गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की तो पूरा खुलासा हो गया।
एत्माद्दौला थाना के इंस्पेक्टर ने बताया कि मंगलवार को दस और पीड़ित सामने आए हैं। बैंक के कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी अजय की मदद कर रहे थे। दूसरों के क्रेडिट कार्ड उसे सौंप रहे थे। उसने दूसरों के नाम के हस्ताक्षर भी खुद किए।
पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराएं लगाई हैं। ठगी के शिकार लोगों में राहुल तोमर, गुड्डी, शिवभक्त, विवेक, राजीव, योगेश, रमेश, हरि, जयवीरी के नाम भी शामिल हैं। इनसे 25 हजार से 75 हजार तक की ठगी की गई है।
पुलिस ने बताया कि अमित ने ठगी में लाखों रुपये कमाए। उसने पहले एक बाइक खरीदी। इसके बाद कार ली। एक ऑटो लिया, उसे किराए पर चला दिया। इसके बाद एक आरओ प्लांट लगाया और पानी की सप्लाई करने लगा।
उसका कारोबार जम गया था। वह गर्मी की छुट्टियों में घूमने के लिए गोवा गया था। इतने सारे क्रेडिट कार्ड उसके पास थे। जो मन करता, वह कर रहा था। कभी किसी पर लोन लेता, कभी किसी कार्ड से खरीदारी करता।
एसपी सिटी प्रशांत वर्मा ने बताया कि अजय सिसौदिया क्रेडिट कार्ड बनवाते समय मोबाइल नंबर अपना और अपने रिश्तेदारों का देता था। वेरिफिकेशन के लिए कॉल उन्हीं नंबरों पर आती थी।
बाद में क्रेडिट कार्ड चालू करने के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भी उन्हीं नंबरों पर आता था। कार्ड उसके पास आ ही जाते थे। इन पर लोन लेता चला गया।