आगरा में नगर निगम की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करके निजी आवास बना लेने के मामले में विजिलेंस ने सोमवार को एडीए के सेवानिवृत्त सहायक अभियंता संतोष कुमार जैन और ठेकेदार गोविंद राम को गिरफ्तार कर लिया है।
इनके खिलाफ 11 साल पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले में और भी कई आरोपी हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए भी दबिश दी गई है। वे अभी हाथ नहीं आए हैं।
यह मामला 1997 का है। नजूल की जमीन पर कब्जा होने पर शासन ने आदेश दिया था कि इन पर इमारत नहीं बनाई जाएं। इसके बावजूद एडीए के अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदारों ने एक नहीं सुनी। ठेकेदारों से रिश्वत ली और इमारतें बनने दीं।
बहुमंजिला इमारतें तक बना डालीं। इसकी जांच कराई गई। 2006 में कोतवाली में केस दर्ज करा दिया गया। विजिलेंस इसकी जांच कर रही थी। आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य मिल चुके हैं। कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हैं। इन्हें तामील कराने के लिए सोमवार को इंस्पेक्टर आरके शर्मा के नेतृत्व में गिरफ्तारी का अभियान चलाया गया।
यहां से किया गया गिरफ्तार
इसमें नॉर्थ ईदगाह निवासी संतोष कुमार जैन को उनके आवास से और कोतवाली के खिरनी गली निवासी गोविंद राम को भी उनके आवास से ही गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को मंगलवार को मेरठ स्थित एंटी करप्शन कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। जैन पर रिश्वत लेने और गोविंद पर अवैध निर्माण का आरोप है।
यह केस शासन के आदेश पर दर्ज किया गया था। इसमें एडीए के तत्कालीन चार अधिशासी अभियंता आरोपी बनाए गए थे। ये हैं ओमप्रकाश, हरवंश लाल दुआ, बीके गोयल, राजवीर सिंह, दो सहायक अभियंता नामजद किए गए। संतोष कुमार जैन और शिव प्रताप सिंह, पांच तत्कालीन जेई थे, केसी पाराशर, अजयवीर सिंह, जयपाल सिंह, शिव प्रताप सिंह, सतीश शर्मा। इनके अतिरिक्त गोविंदराम सहित छह ठेकेदार थे।
जांच के दौरान दो आरोपियों की मौत भी हो चुकी है। इसका पता भी मंगलवार को उनके घर दबिश देने पर चला। ये हैं राधेलाल और जियाउद्दीन। अन्य फरार आरोपियों के घर फिर से दबिश दी जाएगी।