आगरा के कमला नगर के कारोबारी विनोद अग्रवाल पर आंख मूंदकर गैंगस्टर एक्ट लगाने के मामले में अपनी जगहंसाई कराने केबाद पुलिस को गलती का अहसास हुआ।
पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट देकर न केवल विनोद की नामजदगी को गलत बताया बल्कि उनकी रिहाई किए जाने की अपील भी की। इस पर कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।
कारोबारी 72 घंटे जेल में रहने के बाद सोमवार शाम को बाहर आ गए। इन तीनों दिन पुलिस की खूब किरकिरी हुई। एससी आयोग के अध्यक्ष एवं सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने अफसरों तक को खरी- खरी सुनाई। इसके बाद दो दरोगा निलंबित किए।
इसलिए घबरा गए अफसर
भाजपाइयों ने यह मामला सीएम तक ले जाने की चेतावनी दी थी। इससे पुलिस के अफसर घबरा गए। आननफानन में धारा 169 के तहत रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में दाखिल कर दी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि धोखाधड़ी और जालसाजी के मुकदमे में विनोद की नामजदगी भ्रमवश हो गई थी, उन पर गैंगस्टर एक्ट भी गलती से लग गया था।
विवेचना अधिकारी ने यह भी लिखकर दिया है कि उससे पूर्व विवेचना कर रहे दरोगा को बताया भी गया था । इसके बावजूद चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
12 जनवरी को भेजा जेल
हरीपर्वत थाना पर यह केस दीप्ति गुप्ता ने दर्ज कराया था। मामला जेल में बंद बिल्डर शैलेंद्र अग्रवाल का प्लाट खरीदने का था। दीप्ति ने यह प्लाट खरीदा था।
इसके बाद बैनामा विनोद के नाम किया गया। केस में आरोप था कि विनोद अग्रवाल ने यह जानते हुए भी कि प्लाट पहले बिक चुका है, उसकी रजिस्ट्री कराई।
बाद में दीप्ति ने पुलिस को शपथपत्र दिया कि विनोद को इसकी जानकारी नहीं थी कि प्लाट पहले बिक चुका है। इसके बावजूद पुलिस ने न केवल विनोद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।