कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन में प्रवासी मजदूर परिवार के साथ पलायन करने को मजबूर हैं। कोई पैदल घर लौट रहा है तो कोई साइकिल से। उन्हीं के साथ किसी मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को सूटकेस पर लिटाकर पैदल सफर तय किया तो कोई अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के साथ सैकड़ों किमी पैदल चली। सोशल मीडिया पर लोग इन मजदूरों की तस्वीरें साझा कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
भोपाल निवासी सिविल इंजीनियर प्रमोद तिवारी ने मजदूर से मजबूर बनी मांओं की पीड़ा को कविता से बयां किया। प्रमोद तिवारी का कहना है कि लॉकडाउन में सड़क पर पैदल चल रहीं मांओं की मुश्किलों को देखकर मन व्यथित हो जाता है। उस मां की मनोदशा को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रयास किया है । वैसे तो उसकी परेशानी को शब्दों में नहीं लिखा जा सकता। पर फिर भी एक प्रयास है।