भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी साहित्यकारों और कवियों की सदैव प्रेरण का स्रोत रहे। साहित्य अनुरागी उनकी कविताओं से प्रेरणा लेते थे। उन्हें महान नेता ओजस्वी वक्ता, कवि जननायक एवं इतिहास पुरुष माना गया।
कासगंज के कवियों का कहना है कि अटल जी के निधन से देश को अपूरणीय क्षति हुई है। शुक्रवार को जिले के साहित्यकारों, कवियों ने काव्यमयी श्रद्धांजलि चिर निंद्रा में सोए अटल जी को दी।
'प्रखर राजनेता कवि थे तुम, एक भले इंसान
जिसकी वाणी से गूंजा था पूरा हिंदुस्तान
थका नहीं था जीवन भर अब चिर निंद्रा में जा लेटा
माटी की था गंध पावनी भारत मां का बेटा'
- डॉ. अखिलेश चंद्र गौड़, संरक्षक निर्झर साहित्यिक संस्था
'भारत कितने वर्षों में रोया, उसने अपना प्रिय नेता खोया
जो अपराजय समर में रहा हमेशा, वो राजनीति का योद्धा सोया'
- कवि अजय अटल
'आज हम सचमुच बहुत मजबूर हैं
आज हम सो नहीं पाए नींदे दूर हैं
अब अटल जी सी कहां हैं खुशबुएं
आज के चंदन अहम में चूर हैं'
- कवि विनय चंदन
'जब कोई सात समुंदर पार हिंदी का वैभव रथ ले जाता है
और प्रलय की छाती पर रख पैर गीत प्रेम के गाता है
वह नाम अटल कहलाता है वह नाम अटल कहलाता है'
- कवि मनोज शर्मा सलभ
'राजनीति के शिखर पुरुष, राष्ट्रनीति के प्रहरी थे
नाम काम के अटल रहे और कट्टरता के बैरी थे
कवि हृदय साहित्यिक चेतना, अलख जगाकर चले गए
चिर निंद्रा में लाल सो गए बम भोले से लहरी थे'
- कवि डॉ. शंकर लाल
'कवि नेता वक्ता गया करके दुनिया रिक्त
कल का दिन दुखमय रहा, संदेशा था तित्त
एक व्यक्ति ऐसा गया जो था अटल उदार
जीत जीत जी भर जिया गया मौत से हार'
- कवि डॉ. रामप्रकाश पथिक
आज हर भारतवासी की आंख बहुत है नम
कोई सिसकी भर भर रोता, किसी का रुकता दम
गए अटल जी छोड़ सभी को रोता और बिलखता
कौन सहारा बने किसी का, हर कोई बेदम
- कवि अखिलेश सक्सेना, सचिव निर्झर