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मथुरा वेंटिलेटर घोटाला: पीएमओ के सचिव करेंगे मामले की जांच, स्वास्थ्य विभाग की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Tue, 01 Jun 2021 12:56 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

कोरोना महामारी के दौर में मथुरा जनपद में हुए वेंटिलेटर घोटाले की जांच शुरू हो गई है। जांच पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) के सचिव अंबुज शर्मा को ट्रांसफर हो गई है। अब अंबुज शर्मा वेंटिलेटर घोटाले की जांच करेंगे। इसकी जानकारी शिकायतकर्ता रजत नारायण ने दी है। 
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वेंटिलेटर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद हेमा मालिनी, यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, विधायकों की बैठक में प्रधानमंत्री राहत कोष से मथुरा को दिए गए वेंटिलेटर पर अधिकारियों से चर्चा हुई तो बड़े घोटाले का खुलासा हुआ था। प्रधानमंत्री राहत कोष से मिले 20 वेंटिलेटर में से 13 वेंटिलेटर अकेले एक निजी अस्पताल को प्रशासन ने मुहैया करा दिए थे, जिन्हें ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने वापस ले लिया है। 

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इस मामले में समाजवादी पार्टी ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके बाद दिल्ली की एक निजी संस्था के अध्यक्ष रजत नारायण ने घोटाले की शिकायत पीएमओ से की। रजत नारायण की शिकायत पर अब वेटिंलेटर घोटाले की जांच शुरू हो गई है। 

रजत नारायण ने बताया कि वेंटिलेटर घोटाले की जांच पीएमओ के सचिव अंबुज शर्मा को मिली है। जांच में कई स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ निजी अस्पतालों की गर्दन भी फंस सकती है। बता दें कि जनपद के कई निजी अस्पतालों ने कोरोना महामारी को अवसर में बदला और कोविड उपचार के नाम पर लाखों की वसूली भी की। डीएम के आदेश पर निजी अस्पतालों के खिलाफ जांच बैठी हुई है।

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घोटाले की जांच के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा 
सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता प्रह्लाद कृष्ण शुक्ल ने निजी संस्थानों को दिए गए वेंटिलेटर की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करने की अपील की है।

अधिवक्ता ने बताया कि वैश्विक आपदा के सामने आम जनमानस के लिए जीवन जीना ही किसी संघर्ष से कम नहीं है। ऐसे समय में जहां केंद्र और राज्य सरकारें अपने 100 फीसदी प्रयास जनहित में समर्पित कर रही हैं। वहीं प्रशासन के अधिकारियों और समाजसेवा के नाम पर कुछ निजी मेडिकल संस्थानों द्वारा कोविड-19 के विरुद्ध इस संघर्ष में आम आदमी के साथ न्याय करने के बजाए इस आपदा को असंवेदनशीलता का पर्याय बनाकर रख दिया गया है। 

सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि यदि यह 20 वेंटिलेटर सरकारी अस्पताल में लगाए जाते तो गरीब मरीजों को इनका नि:शुल्क लाभ भी मिल सकता था। पत्र में मुख्य न्यायाधीश से जिला प्रशासन द्वारा बरती गई अनियमितता की जांच कराने की मांग की है।
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