मैनपुरी। पथकर विक्रेताओं को रोजगार देने के लिए शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना का लाभार्थियों को लाभ नहीं मिल रहा है। ऋण स्वीकृत होने के बाद भी लाभार्थी केे खातों में बैंकों से स्वीकृत धनराशि नहीं भेजी जा रही है।
लॉकडाउन अवधि में पथकर विक्रेता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। उनका रोजगार बंद होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम स्वनिधि स्ट्रीट वेंडर योजना लागू की। इसके तहत निकाय क्षेत्रों केे पंजीकृत पथकर विक्रेताओं को 10 हजार रुपये का ब्याज रहित ऋण देने की व्यवस्था के तहत पंजीकृत पथकर विक्रेताओं से आवेदन जमा कराए गए।
जिन पथकर विक्रेताओं का पंजीकरण नहीं था उनको पंजीकरण कराने का मौका दिया गया। पंजीकृत पथकर विक्रेताओं को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ देने के लिए निकायों में लक्ष्य भी तय किया गया। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) की ओर से आवेदन औपचारिकताएं पूरी होने पर बैंकों में ऋण देने के लिए भेजे गए। ऋण स्वीकृत होने के बाद भी आवेदकों के खातों में स्वीकृत धनराशि नहीं पहुंचने से उनको योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
8156 का मिला था लक्ष्य
पीएम स्वनिधि योजना के तहत जिले को 8156 पथकर विक्रेताओं को लाभ देने का लक्ष्य दिया गया था। इसमें नगर पालिका क्षेत्र के लिए 4059 तथा नगर निकायों के लिए 4097 का लक्ष्य तय किया गया था। डूडा के माध्यम से नगर पालिका क्षेत्र में 3500 ऑनलाइन आवेदन किए गए। इनमें से 1266 आवेदकों का ऋण स्वीकृत किया गया।
केस हिस्ट्री-एक
मोहल्ला छपट्टी निवासी अब्दुल रशीद ने नगर पालिका में पंजीकरण होने के बाद पीएम स्वनिधि योजना में आवेदन किया। डूडा से दो महीने पहले उनका आवेदन बैंक के लिए भेजा गया। बैंक से उनके खाते में धनराशि नहीं भेजी गई है। बैंक में उनको सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
केस हिस्ट्री-दो
मोहल्ला महमूदनगर निवासी सलमान ने योजना के तहत पंजीकरण कराया। डूडा से उनका आवेदन बैंक में ऋण स्वीकृत करने के लिए औपचारिकताएं पूरी होने पर भेज दिया गया। बैंक से उनके खाते में न तो स्वीकृत ऋण की धनराशि भेजी गई और न ही जानकारी दी जा रही है।
पीएम स्वनिधि योजना में डूडा केवल पूर्ण आवेदनों को मंजूर करके संबंधित बैंक के लिए भेज देता है। स्वीकृत किए गए ऋण को लाभार्थी के खाते में भेजना बैंक की जिम्मेदारी है। समीक्षा बैठक में बैंक प्रबंधकों को निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। - नितिन कनौजिया, मिशन निदेशक