एटा। प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने की पहल नरेंद्र मोदी की पहली सरकार ने की थी। मिट्टी की जांच करने वाले कर्मचारियों का तीन माह से वेतन नहीं दिया गया। इसकी वजह से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही हैं। इतना ही नहीं विभाग में हजारों नमूने जांच के लिए लैब में पड़े हुए हैं, इनकी जांच नहीं होने से किसानों को भी परेशानी हो रही है।
कृषि विभाग की एटा और अलीगंज में मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए लैब तैयार की गई थी। इन लैबों में ज्यूपिटर नाम की संस्था से आउट सोर्सिंग के माध्यम से टेक्निकल एक्सपर्ट की भर्तियां की थीं। दोनों जगहों पर आठ कर्मचारियों की सेवाएं 30 जून तक ली गई, जबकि वेतन मार्च 2019 तक ही दिया गया है। इतना ही कर्मचारियों को किसी भी तरह की सूचना नहीं दी गई कि आपको सेवाएं देनी है अथवा आपकी सेवाएं समाप्त की जाती हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों को बिना नोटिस अथवा सूचना के कार्य लेना बंद कर दिया गया है। इधर चालू वर्ष में तृतीय चरण के लिए नमूने कृषि विभाग की ओर से एकत्रित किए गए, इनकी संख्या 12 हजार से अधिक है। विभागीय अधिकारियों की मनमानी के चलते मिट्टी नमूनों की जांच अधर में लटक गई है। इसकी वजह से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण नहीं हो पा रहे हैं।
नहीं हुई एक लाख किसानों की मिट्टी की जांच
जिले में कृषि विभाग के अनुसार तीन लाख से अधिक किसानों की संख्या है। इन किसानों में से विभागीय पहल पर दो लाख किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरित करने का दावा किया जा रहा है। इनके अनुसार ही मान लिया जाए तो एक लाख से अधिक किसान अभी भी शेष बचे हैं।
प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत तृतीय चरण का स्वीकृति शासन स्तर से नहीं मिली है। कर्मचारियों का तीन माह का वेतन शासन स्तर से नहीं मिल सका है, इसकी वजह से देरी हो रही है। कर्मचारी आउट सोर्सिंग से हैं कार्यदायी संस्था से वेतन लेने का हक है।
वी के सचान, सहायक निदेशक, मृदा परीक्षण एवं कल्चर प्रयोगशाला, अलीगढ़