... तो राम मंदिर नहीं होगा इस बार भाजपा का मुद्दा
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उत्तर प्रदेश में चुनाव आते हैं तो मंदिर का मुद्दा गरमाने लगता है। विपक्ष का आरोप रहता है कि भाजपा चुनाव में मंदिर का राग छेड़ भावनाओं से खिलवाड़ करती है और विकास का मुद्दा धराशाई हो जाता है। लेकिन रविवार को कोठी मीना बाजार में हुई महा परिवर्तन रैली में प्रधानमंत्री के भाषण ने साफ कर दिया कि यूपी में अब मंदिर-मसजिद का मुद्दा नहीं चलेगा। गांव, गरीब, किसान, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा।
दहशरा पर लखनऊ में प्रधानमंत्री ने एक कार्यक्रम में जय श्री राम का उद्घोष किया तो हल्ला मच गया था कि भाजपा राम मंदिर के मुद्दे पर लौट रही है। लेकिन इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को नहीं छुआ है। न गाजीपुर की रैली में और न ही रविवार को आगरा में। वह विकास के मुद्दे पर बात कर रही है। यह बता रहे हैं कि केंद्र सरकार गरीबों के लिए समर्पित है।
बता दें, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव अभियान शुरू कर दिया है। विकास रथ लेकर प्रदेश में घूम रहे हैं। नोटबंदी पर केंद्र सरकार को घेरने के साथ-साथ सांप्रदायिक पार्टी और मंदिर-मसजिद की राजनीति करने का आरोप लगाते हैं। अपनी पार्टी की उपलब्धियां और विकास का नारा देकर 2017 में साइकिल को दोबारा लखनऊ तक पहुंचाने अपील लोगों से की जा रही है। अखिलेश को जवाब देने के लिए मोदी ने कहा कि अब यूपी में मंदिर, मसजिद की बात नहीं होगी। अपने करीब 35 मिनट के भाषण में उन्होंने न तो हिंदुत्व की बात की और न ही मंदिर, मसजिद की। उन्होंने भ्रष्टाचार, काला धन को मुद्दा बनाने के साथ गांव, गरीब और किसान की बात की है। मध्यम वर्ग से बात शुरू करने वाले प्रधानमंत्री ने गरीब, मजदूर और किसान के दर्द पर मरहम रखने की कोशिश की।
उन्होंने यूरिया और केरोसिन की कालाबाजारी पर प्रहार किया तो गांवों को रोशन करने की योजनाओं के जनधन, उज्ज्वला योजना, शहरी गरीब आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, जनधन योजना को गिनाया। मोदी की रैलियों में जिस तरह भीड़ जुट रही है और नोट बंदी के निर्णय मिल रहे जनसमर्थन से विपक्ष का नोट बंदी के विरोध की तीर भी कारगर नहीं रहा है। इससे तय है कि यूपी में अब चुनाव का मुद्दा भ्रष्टाचार और विकास होगा।