आगरा में अनियोजित और अनियंत्रित विकास से जहां एक तरफ शहर का आधारभूत ढांचा चरमरा रहा है, वहीं बिल्डर और दलालों के मेल से अवैध कॉलोनियों में प्लॉटिंग का ‘खेल’ हो रहा है। सत्ताधारी नेताओं के रसूख के आगे विकास प्राधिकरण के अफसर लाचार हैं। एडीए एप्रूव्ड के झांसे में आकर खरीदार जिंदगीभर की पूंजी गवां रहे हैं।
जन प्रहरी के संयोजक नरोत्तम शर्मा ने बताया कि अवैध कॉलोनियों की निगरानी एडीए का फील्ड स्टाफ करता है। बिल्डर व दलाल उन्हें कमीशन देते हैं, जिसके कारण अवैध कॉलोनियां में लोग फंस जाते हैं। एडीए से बिना मानचित्र स्वीकृत कराए एडीए एप्रव्ड का झांसा देकर दलाल प्लॉट बेचते हैं।
सपोर्ट इंडिया सोसायटी अध्यक्ष सुरेश चंद सोनी का कहना है कि एडीए दलालों का सबसे बड़ा अड्डा है। जूनियर व असिस्टेंट इंजीनियर से लेकर बाबू दलालों संग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। नामांतरण से लेकर नक्शा पास कराने, प्लॉटिंग, सीलिंग व कंपाउडिंग में भ्रष्टाचार होता है। खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
876 कॉलोनियां एडीए से एप्रूव्ड हैं
एडीए दफ्तर में दलालों के प्रवेश पर रोक लगाई है। प्रवर्तन विभाग से जांच कराई जाएगी। अवैध प्लॉटिंग व कॉलोनी को सील किया जाएगा।