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एक दिन में 36 लाख पौधे रोपे

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आगरा। शहर में हरियाली के लिए मंगलवार को 36 लाख पौधे रोपने का दावा किया गया। ताजमहल के साए तले ताज वन ब्लॉक में प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ने वन महोत्सव की शुरूआत हरीशंकरी पौधा रोपकर की। उन्होंने बुधवार और बृहस्पतिवार को 7 लाख पौधे लगाने और बाकी 7 लाख पौधे 15 अगस्त को लगाने के लिए कहा।
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जिले में 26 विभागों ने 36 लाख पौधे लगाने के आंकड़े वेबसाइट पर पेश किए, लेकिन इनमें से ज्यादातर पौधे बिना बैरिकेडिंग, ट्री गार्ड और फेंसिंग के ही लगाए गए हैं। ठीक इसी तरह बीते साल भी रिकॉर्ड बनाने के नाम पर पौधरोपण किया गया, लेकिन उन पौधों का अब पता नहीं है। पिछले वर्ष पालीवाल पार्क में जिस जगह से शुरूआत की गई थी, वहां वीआईपी मेहमानों के लगाए पौधे भी नहीं बचे हैं।
ताज नेचर वॉक के पास ताज वन ब्लॉक में मंगलवार सुबह प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने 400 वर्ग मीटर जमीन पर मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया। उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु, महेश के प्रतीक हरीशंकरी पौधेे को रोपा। उनके साथ विधायक रानी पक्षालिका सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू सिंह भदौरिया, प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी, डीएम प्रभु एन सिंह, सीडीओ ए मनिकंडन ने पौधे लगाए। इस दौरान डीएफओ अखिलेश पांडेय, भाजपा जिलाध्यक्ष गिर्राज सिंह, शहर अध्यक्ष भानु महाजन मौजूद रहे।
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हर व्यक्ति एक पौधा लगाए और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाए। अगले पांच सालों में हम वनावरण 9 से बढ़ाकर 15 फीसदी करने का प्रयास करेंगे। - भूपेंद्र सिंह चौधरी, पंचायतीराज मंत्री
सरकारी विभाग के साथ अभियान से लोगों को जोड़ें, उन्हें भी जिम्मेदारी दें, तब पौधे बचेंगे। किसी खास मौके, स्थल को चुनकर पौधे लगाएं। लोगों की भागीदारी बढ़ेगी तो अभियान सफल होगा। - सुनील चौधरी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक
वन महोत्सव में 51 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य बेशक दिया गया हो, पर कागजों पर गिनती पूरी करने के लिए महज एक फुट की दूरी पर खोदे गए गड्ढों में एक साल की मेहनत के बाद तैयार किए पौधे लगाए गए। सड़कों के डिवाइडर पर बेहद नजदीक लगाए पौधों की सुरक्षा के लिए न तो बैरिकेडिंग की गई न ही ट्री गार्ड लगाए गए। कंटीले तारों को लगाए बिना ही सड़कों, मैदानों और पार्कों में पौधे लगाए गए हैं, जबकि बीते सालों का अनुभव ये रहा है कि इन पौधों को जानवरों ने ही नष्ट कर दिया। शास्त्रीपुरम, पश्चिमपुरी रोड के डिवाइडर पर लगाए पौधों को रात में ही गायों ने खा लिया था।
दो साल पहले नगर निगम ने हाथीघाट से एत्माद्दौला व्यू प्वाइंट के बीच यमुना की तलहटी में 28 हजार पौधे लगाए थे, जिनकी फें सिंग न होने के कारण पहले भैंसें और गाय खा गईं। जो बचे, उसे बाढ़ ने नष्ट कर दिया। जबकि वन विभाग अपनी नर्सरियों में सालभर की मेहनत के बाद इन पौधों को तैयार करता है। नर्सरी से विभागों के पास पहुंचने के बाद वह कागजी अभियान में सप्ताहभर भी जीवित नहीं रह पा रहे। बीते तीन सालों से वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के नाम पर ऐसे ही पौधरोपण हो रहा है, लेकिन इनमें से कितने बचे, इसका कोई रिकॉर्ड विभागों ने नहीं सौंपा।
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