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यमुना में गंदा पानी रोकने के लिए सरकार ने उठाया ये कदम, प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे एक हजार करोड़

Wed, 06 Jun 2018 01:54 PM IST
राजीव शर्मा, अमर उजाला आगरा
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यमुना नदी में सीधे गिर रहे नालों को टैप करने और गंदे पानी को नदी में जाने से रोकने के लिए एक हजार करोड़ से अधिक रुपये खर्च करने की तैयारी है। 
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इसके लिए यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। 1093.87 करोड़ रुपये में से 400 करोड़ नालों को टैप करने, तीन नए एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और आठ छोटे एसटीपी बनाने पर खर्च किए जाएंगे। 

शेष धनराशि अगले 15 वर्ष तक इनके रखरखाव पर व्यय की होगी। यह योजना नमामि गंगे की तरह से तैयार की गई है। यमुना में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) काफी गंभीर है। 
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इसे बचाने के लिए अब तक क्या किया गया और आगे क्या कार्ययोजना है, इसको लेकर ट्रिब्यूनल जवाब तलब कर चुका है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर कवायद तेज कर दी। 

यमुना का जलस्तर घटा - फोटो : अमर उजाला
यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सर्वे कर यमुना नदी में सीधे गिरने वाले 90 नाले चिह्नित किए थे, इनमें कई नाले टैप किए जा चुके हैं।शेष 61 नालों को टैप करने और गंदे पानी के शोधन के लिए एसटीपी निर्माण की योजना तैयार की गई है। 

इनमें कई बड़े नाले हैं। धांधुपुरा, जगनपुर और पीलाखार में बड़े एसटीपी बनाए जाएंगे वहीं आठ अन्य स्थानों पर नालों के पास छोटे एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। ताकि गंदे पानी को सीधे यमुना में जाने से रोका जा सके। 

यमुना को दूषित होने से बचाने के लिए यह पहली योजना है जो अगले 15 सालों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।  यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने जिन तीन स्थानों पर बड़े एसटीपी निर्माण की कार्ययोजना तैयार की है। 

वहां पहले से ही एसटीपी बने हुए हैं। धांधपुरा में 78 एमएलडी, जगनपुर में 14 एमएलडी और पीलाखार में 10 एमएलडी क्षमता के लाखों रुपये खर्च करके एसटीपी बनाए गए थे। मगर, इनमें से एक भी एसटीपी कार्यरत नहीं है। 
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अभी तो लगभग सभी नाले सीधे गिर रहे यमुना में

इसकी वजह से नालों का गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है। यही वजह है कि यमुना में प्रदूषण कम नहीं हो पा रहा। इससे पहले नालों को टैप करने के लिए कई बार अभियान चलाया गया। इस पर लाखों रुपये खर्च भी किए गए। 

इसको लेकर एनजीटी में भी रिपोर्ट लगाई गईं। मगर, कुछ नालों को छोड़कर लगभग सभी नाले अभी सीधे यमुना में गिर रहे हैं।मंडलायुक्त के राममोहन राव का कहना है कि यमुना में सीधे गिर रहे नालों को रोकने के लिए टीटीजेड की बैठक में निर्देश दिए गए थे।इस पर योजना तैयार कर ली गई है। यमुना को दूषित नहीं होने दिया जाएगा।

यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई परियोजना प्रबंधक खालिद अहमद का कहना है कि यमुना में गंदा पानी जाने से रोकने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का यह प्रस्ताव है। लखनऊ में इसको लेकर उच्च अधिकारियों से वार्ता हो चुकी है।
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