आगरा। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट परवेंद्र कुमार शर्मा ने मानसिक दिव्यांग महिला से सामूहिक दुष्कर्म और दलित उत्पीड़न के मामले में आरोपी इकलाख और असलम को वादी, पीड़िता और प्रत्यक्षदर्शी गवाह के मुकरने पर बरी कर दिया। गवाही से मुकरने पर वादी के खिलाफ विधिक कार्रवाई के आदेश किए हैं।
इस मामले में थाना कागारौल में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वादी ने कहा था कि दस फरवरी 2019 की दोपहर को उसकी पत्नी स्कूल के समीप लकड़ी बीन रही थी। वह मानसिक रूप से कमजोर है। तभी आरोपी इकलाख और असलम आ गए। दोनों ने उसकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया। शोर सुनकर आए दो लोगों को देखकर आरोपी भाग गए। मामले में प्रारंभिक विवेचना एसआई जनमेद सिंह ने की।
पीड़िता के अनुसूचित जाति से होने के कारण विवेचना तत्कालीन सीओ नमृता श्रीवास्तव को दी गई। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाही के लिए वादी मुकदमा, पीड़िता, प्रत्यक्षदर्शी गवाह, सीओ सहित 11 गवाह को अदालत में पेश किया। गवाही के दौरान वादी मुकदमा, पीड़िता और प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपनी पूर्व में गवाही से मुकर गए।
इस पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट परवेंद्र कुमार शर्मा ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज पाठक के तर्क एवं साक्ष्य के अभाव में आरोपी इकलाख और असलम को बरी करने के आदेश किए। गवाही से मुकरने पर वादी के खिलाफ विधिक कार्रवाई के आदेश भी किए हैं।